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Monday, January 30, 2023

साइकिल से दूध बेचती इस 62 वर्षीय विधवा की कहानी जानकर आप रो पड़ेंगे

इंसान को अपने जीवन में कभी-कभी ऐसा कार्य करना पड़ जाता है जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं होता। नियति कई बार इंसान को उसके सोच के विरुद्ध कार्य करने पर मजबूर कर देती है। आज हम जिस व्यक्ति के बारे में जानेंगे, उनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनको कभी ऐसा भी करना पड़ सकता है।

शीला बुआ की शादी आज से 41 वर्ष पहले 1980 में अवागढ़ के रामप्रकाश के साथ हुई थी। उनके शादी का एक वर्ष भी नही हुआ था और उनके पति गुजर गए। अपने पति के अकस्मात मृत्यु के बाद वो अपने मायके आ गई। जब उन्होंने अपनी दूसरी शादी करने के बारे में सोचा तो उनके भैया कैलाश किसी बीमारी की वजह से गुजर गए। अपने भैया के गुजरने के बाद उन्होंने अपने मन से शादी का विचार छोड़ दिया और अकेले रहने का निश्चय कर लिया।

शीला बुआ अपने मायके में रह कर अपने पिताजी के साथ खेती का काम करने लगी। धीरे धीरे उनके पिताजी ने उनकी चार बहनों और भाई विनोद का भी विवाह कर दिये। सभी के विवाह कर देने के बाद 1996 में उनके पिताजी भी चल बसे। पिताजी के गुजर जाने के कुछ दिन बाद ही उनकी मां भी गुजर गई। नियति ने भले ही उनको विधवा बना दिया लेकिन वो कठिन परिस्थितियों के बीच भी डटी रही। इसके बाद शीला बुआ ने भैंस पालन के बारे में सोचा। आज उनके पास 5 भैंसे हैं जिनसे उन्हें रोजाना करीब 40 लीटर दूध प्राप्त होता है। वह रोजाना सुबह 4 बजे उठकर बाल्टियों में दूध भर कर साइकिल पर बेचने के लिए चल पड़ती हैं।

वह पिछले 24 सालों से पशु पालन करके अपना जीवन व्यतीत कर रही हैं। शीला बुआ 62 वर्ष कि होते हुए भी साइकिल चलाकर घर घर जाकर दूध बेचा करती हैं। जिस उम्र में लोग आराम करना चाहते हैं उस उम्र में भी वो कड़ी मेहनत करके अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। वो कहती हैं कि उनके ऊपर अभी भी बहुत सारी जिम्मेदारियां हैं जिसके चलते वह चाहकर भी आराम नहीं कर सकती। शीला बुआ के भाई विनोद की 6 पुत्रियां हैं।

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विनोद की पुत्रियों में सबसे बड़ी सोनम है और वह भी विधवा है। वह भी उनके ही पास ही रहती है। सोनम की भी 6 बेटियां हैं। शीला बुआ के मायके में व्यक्तियों की संख्या ज्यादा है इसीलिए शीला बुआ को इस उम्र में भी कार्य करना पड़ता है। शीला बुआ अपने जीवन के सभी कठिनाइयों का सामना कर दिन रात एक करके मेहनत करती है जिससे वे अपने पूरे परिवार का परवरिश कर रही हैं। उन्हें किसी के आगे हाथ फैलाना अच्छा नहीं लगता, हाथ फैलाने से अच्छा उन्हें खुद को आत्मनिर्भर बनाना लगता है।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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