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Thursday, February 2, 2023

83 वर्ष की उम्र में वजन तोलकर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर रहे हैं, किसी से नहीं लेते कोई मदद

गृहस्थ जीवन से पहले व्यक्ति का आत्मनिर्भर होना अत्यन्त आवश्यक है। दूसरों पर निर्भर लोगों के लिए गृहस्थ जीवन दु:खों का पहाड़ साबित होता है। इसलिए गृहस्थ जीवन की शुरूआत से पहले लोग रोजगार की तलाश में जुट जाते हैं । आत्मनिर्भरता आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक होती है, जिसके कारण सफलता की राह आसान हो जाती है। आज हम आपको एक ऐसे वृद्ध की कहानी बताएंगे जो वजन करने वाली मशीन से परिवार चलाते हैं। वह 83 वर्ष के हैं पर किसी से मदद नही लेते।

आइये जानते हैं बलदेव राज आहूजा की संघर्ष भरी कहानी?

बलदेव राज आहूजा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गोपालनगर के रहने वाले है। इनकी उम्र है 83 वर्ष। बलदेव जी गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद उम्र के इस पड़ाव में किसी से मदद की चाहत नहीं रखते। स्वाभिमान से जीना चाहते हैं। इसलिए वजन तोलने की मशीन को अपना रोजगार का साधन बनाकर बमुश्किल दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर पाते हैं। कई बार खाली हाथ भी घर जाना पड़ता है। प्रतिदिन यह एक हाथ मे लाठी के सहारे दूसरे हाथ में वजन तोलने की मशीन लेकर बैठते है।

बैंक के सामने बैठते है बुजुर्ग।

आहूजा वजन तोलने की मशीन सामने रखकर लोगों को वजन तोलने के लिए इशारा करते हैं। बैंक में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोग आते जाते हैं। लेकिन बैंक की पार्किंग में खड़े दुपहिया वाहनों के बीच बैठे बलदेव राज पर बहुत कम लोगों की नजर पड़ती है। बुजुर्ग होने के कारण बोलने की क्षमता भी बहुत कम है। ऐसे में जमीन पर लाठी की आवाज से आने-जाने वाले लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित करके उन्हें वजन तोलने के लिए इशारा करते हैं। वजन तोलने का कोई मूल्य नहीं रखा हुआ है। जिसकी जो इच्छा हो दे जाता है।

20-50 रुपये ही रोज कमा पाते हैं।

जो जितना देता है, बलदेव जी ग्राहक को भगवान का रूप मानकर उसे स्वीकार कर लेते हैं। वह एक दिन में कभी 20 से लेकर 50 रुपये तक कमा लेते है। कभी खाली हाथ भी वापस जाना पड़ता है उन्हें।

पुत्र की मृत्यु के बाद से काम कर रहे है आहूजा।

कुछ वर्ष पूर्व उनके युवा पुत्र की हृदय गति रुक जाने से मौत हो गई थी। अब बीमार पत्नी व बेटे के दो बच्चों की जिम्मेदारी भी बलदेव राज के कंधों पर ही है। पुत्र की इच्छा थी कि मरने के बाद उसके नेत्रदान कर दिए जाए। नेत्रदान के बाद संस्था वालों ने उनकी मदद के लिए पैसा देना चाहा लेकिन बलदेव राज पैसा लेने से साफ इनकार कर दिया।

जो लोग भी उनके आस-पास रहते हैं उन्हें ऐसे स्वाभिमानी बुजुर्ग बलदेव राज के पास जाकर उनका हौसला बढ़ाना चाहिए और उनके छोटे से रोजगार को बढ़ावा देना चाहिए। उनकी मशीन से अपना वजन तोल कर उसका मूल्य देना चाहिए। ऐसा करने से आपको दुआ मिलेगी और उनके परिवार को दो वक्त की रोटी।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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