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Wednesday, May 31, 2023

अमेरिका में पढ़ेगा बिहार के एक मजदूर का बेटा, जानें कैसे मिली 2.5 करोड़ की स्कॉलरशिप

हम जो चाहें वह कर सकते हैं। कहा जाता है बच्चे में काबिलियत हो तो उसके बैकग्राउंड से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उनके माता-पिता क्या करते हैं। लोग अपनी काबिलियत के बदौलत उपलब्धि हासिल करते हैं। आज हम आपको बिहार के रहने वाले प्रेम कुमार (Prem Kumar) के बारे में बताएंगे। प्रेम ने अपने काबिलियत के बलबूते पर अमेरिका जा कर पढ़ने के लिए 2.5 करोड़ की छात्रवृत्ति प्राप्त की है। आइये जानते हैं प्रेम ने यह उपलब्धि कैसे हासिल की।

प्रेम के पिता मजदूर

प्रेम कुमार बिहार की राजधानी पटना (Patna) से सटे फुलवारीशरीफ के गोनपुरा गांव के रहने वाले हैं। प्रेम कुमार के पिताजी एक दिहाड़ी मज़दूर हैं। आपको बता दें कि एक दिहाड़ी मजदूर का 17 वर्ष का बेटा अमेरिका (America) पढ़ने जायेगा इससे बड़ी खुशी की बात क्या हो सकती है।

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अमेरिका के टॉप कॉलेज में पढ़ेंगे प्रेम

प्रेम ने यह उपलब्धि खुद के काबिलियत के दम पर हासिल किया है। प्रेम कुमार अपने ग्रेजुएशन (Graduation) की पढ़ाई पूरी करने के लिए अमेरिका के टॉप 25 महाविद्यालयों में से एक प्रतिष्ठित लाफायेट कॉलेज जायेंगे। अमेरिका का यह कॉलेज साल 1826 में स्थापित हुआ था और यह लगातार अमेरिका के टॉप 25 महाविद्यालयों में से एक है।

दुनियां भर के 6 छात्र चयनित

प्रेम ने 2.5 करोड़ रुपए का छात्रवृत्ति (Scholarship) प्राप्त किया है। इस छात्रवृति के अंतर्गत ही उनका ट्यूशन फीस, किताबें, निवास, लाइफ इंश्योरेंस तथा यात्रा की खर्चे शामिल हैं। हम आपके जानकारी के लिए बता दें कि यह छात्रवृत्ति दुनियां भर में प्रेम के साथ-साथ 5 अन्य छात्रों को भी मिली है। यानी कि दुनिया भर में 6 छात्र ही ऐसे हैं जिन्हें यह छात्रवृति प्रदान की गई है।

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ग्रेजुएशन के लिए अमेरिका जाएंगे प्रेम

प्रेम कुमार वर्तमान में शोषित समाधान केंद्र में इंटरमीडिएट (Intermediate) के छात्र हैं और यह अमेरिका 4 वर्षो के लिए जा रहे हैं। वहां प्रेम अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई मैकेनिकल इंजीनियरिंग (Mechanical Engineering) से पूरी करेंगे तथा अंतरराष्ट्रीय संबंध की पढ़ाई करेंगे। लाफायेट की यह छात्रवृत्ति ऐसे छात्रों को दी जाती है जिसमें विश्व की कठिन से कठिन समस्याओं को समाधान करने का आंतरिक प्रेरणा और कटिबंधता हो।

शरद सागर ने पहचानी प्रतिभा

प्रेम की काबिलियत को राष्ट्रीय संगठन डेक्सटेरिटी ग्लोबल ने पहचाना तभी से उन्हें डेक्सटेरिटी के द्वारा ट्रेनिंग दिया जाने लगा। डेक्सटेरिटी ग्लोबल के शरद सागर (Sharad Sagar) बताते हैं कि वर्ष 2013 से उन्होंने बिहार में महादलित बच्चों पर काम करना शुरू कर दिया। इस वर्ग के छात्रों के माध्यम से भावी पीढ़ी के लिए नेतृत्व बनाना एवं उन्हें श्रेष्ठ यूनिवर्सिटी में भेजना उनका मुख्य लक्ष्य बन गया।

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अपने परिवार में पढ़ने वाले पहले व्यक्ति है प्रेम

इतनी बड़ी राशि का छात्रवृति पाने वाले प्रेम बताते हैं कि उनके परिवार में अभी तक किसी ने भी स्कूल (School) का मुंह तक नहीं देखा था लेकिन अब वह अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए अमेरिका जाएंगे और यह बात अविश्वसनीय है। आज प्रेम की तारीफ हर तरफ हो रही है। प्रेम को आगे के लिए हम शुभकामनाएं देते हैं।

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Shubham Jha
Shubham Jha
शुभम झा (Shubham Jha)एक पत्रकार (Journalist) हैं। भारत में पत्रकारिता के क्षेत्र में बदलाव लाने की ख्वाहिश रखते हैं। वह चाहते हैं कि पत्रकारिता स्वच्छ और निष्पक्ष रूप से किया जाए। शुभम ने पटना विश्वविद्यालय (Patna University) से पढ़ाई की है। वह अपने लेखनी के माध्यम से भी लोगों को जागरूक करते हैं।

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