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Monday, January 30, 2023

एक ऐसा गुरुद्वारा जहाँ कोई लंगर नही लगता फिर भी वहाँ से कोई भूखा वापस नहीं लौटता।

इंसान हो या जानवर उनकी निस्वार्थ सेवा करना ही हमारा सबसे बड़ा धर्म है। आज हम आपको एक ऐसे गुरुद्वारा के बारे में बताएंगे, जहाँ किसी भी धर्म से बड़ा इंसानियत के धर्म को माना गया है।

लंगर की व्यवस्था सर्वोपरि है।

इंसानियत का दूसरा नाम “सिख धर्म” है। सिख धर्म में लंगर की विशेषता सर्वोपरि है। दूर-दूर से गुरुद्वारा में आने वाले लोगों के लिए लंगर लगाया जाता है। सिख धर्म में मानव सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। किसी के पास अगर खाने के लिए पैसे नहीं हो या फिर कहीं खाना ना मिला हो तो वह व्यक्ति गुरुद्वारा में जाकर कभी भी अपनी भूखा मिटा सकता है। भारत के हर गुरुद्वारा में लंगर की व्यवस्था रहती है लेकिन एक ऐसा भी गुरुद्वारा है जहां लंगड़ नहीं बनता है लेकिन वहां से कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं लौटता।

चंडीगढ़ में है यह प्रसिद्ध गुरुद्वारा

चंडीगढ़ (Chandigarh) के प्रसिद्ध नानकसर (Nankasar) गुरुघर (Gurughar) नाम के गुरुद्वारा में कोई गोलक नहीं है और यहां लंगर भी नहीं बनाया जाता है। चंडीगढ़ के सेक्टर नंबर 28 में गुरुद्वारा साहिब की कमेटी नहीं बनी है फिर भी यहां आने वाले लोगो के लिए लंगर का सिलसिला जारी रखा गया है।

दानकसर गुरुघड़ी में लंगर के लिए इंतजार करना पड़ता है

इस गुरुद्वारा में संगत में आने वाले श्रद्धालु अपने-अपने घर से ही लंगर लेकर निकलते हैं जिसमें देसी घी के परांठे, सब्जी, दाल मिठाइयां एवं फल होते हैं। लंगर से बचे खाने को सेक्टर 16 और 32 में स्थित अस्पताल में PGI में भेज दिया जाता है। इसके साथ ही वहां के लोगों को लंगर का प्रसाद मिल जाता है। वहां के लोगों को प्रसाद बांटने के लिए 2 से 3 महीने का इंतजार करना पड़ता है ताकि वह अपनी तरफ से लंगर का प्रसाद लोगों में बांट सके।

काफी पुराना है यह गुरुद्वारा

नानकसर गुरुद्वारे के बारे में इंचार्ज बाबा गुरुदेव सिंह (Baba Gurudev Singh) का कहना है कि इस गुरुद्वारे के निर्माण की अवधि 50 से भी अधिक वर्ष हो चुकी है। इस गुरुद्वारे का क्षेत्रफल 1 एकड़ है और यहां पुस्तकालय की भी व्यवस्था की गई है। प्रत्येक वर्ष मार्च के महीने में वार्षिक समागम मनाया जाता है जो 7 दिनों तक चलता है। बड़ी संख्या में लोग संकट के समागम में शामिल होने के लिए देश-विदेश से आते हैं। इस समागम के दौरान ही यहाँ रक्तदान शिविर भी लगाया जाता है।

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मानवता का सबसे बड़ा उदाहरण है यह गुरुद्वारा

इस गुरुद्वारे में अखंड पाठ किया जाता है। इस गुरुद्वारे में तीन बार लंगर लगाया जाता है। लोग अपने-अपने घरों से लंगर लेकर आते हैं। कोई सुबह, कोई शाम तो कोई रात को लंगर लगाता है और इस गुरुद्वारा की सबसे खास बात यह है कि यहां हर वक्त अखंड पाठ किया जाता है और प्रत्येक माह अमावस्या को दीवान सजाया जाता है। यह धार्मिक स्थल सिर्फ सिख धर्म के लिए ही नहीं बल्कि हर धर्म के लोग के लिए खुला है। यहां सभी धर्म के लोग आते हैं और लंगर लगाते हैं एवं मानवता की सेवा कर धर्म कमाते हैं।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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