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Monday, January 30, 2023

रिक्शा चलाकर बेटे को पढ़ाया, बेटे ने कड़ी मेहनत की और बन गए IAS: प्रेरणा

हम अपने हौसले से जो चाहे वो कर सकते हैं। ऊंच-नीच, अमीर-गरीब इत्यादि कोई ऐसी बाधा नहीं है जो हमारे दृढ़ संकल्प को तोड़ सके। आज हम एक ऐसे पिता के बारे में जानेंगे जिन्होंने रिक्शा चला कर अपने बेटे को IAS बनाया और उस महान बेटे के बारे में भी जानेंगे जिन्होंने अपने परिवार की स्थिति देख कर ध्यान लगा कर पढ़ाई किया और सफलता हासिल किए।

गोविंद जयसवाल 2007 के बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनका जीवन बहुत ही संघर्ष भरा रहा है। गोविंद उत्तर प्रदेश के बनारसी के रहने वाले हैं। गोविंद के आईएएस बनने के पीछे इनके पिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। गोविंद के पिता का नाम नारायण जयसवाल है। वे एक रिक्शा चालक थे। जो दिन-रात रिक्शा चलाकर अपने बेटे को पढ़ाते थे। गोविंद के पिता के पास 40 रिक्शा था लेकिन पत्नी के बीमार हो जाने और बेटे की पढ़ाई में रुपए की जरूरत होने से उन्होंने 20 रिक्शा बेच दिया। जब उन्हें पैसे की बहुत ज्यादा जरूरत हो गई तो उन्होंने सारे रिक्शा बेच दिया और खुद एक रिक्शा चलाने लगे।

हर मां-बाप अपने बच्चे को बेहतर शिक्षा देना चाहते हैं। अपने बच्चे को अफसर बनाना चाहते हैं। बच्चे भी ऐसे होने चाहिए जो अपने मां-बाप के सपनों पर खरा उतर सकें। वे अपने माता-पिता के सपने पूरे कर सकें। गोविंद के पिता भी अपने बेटे के लिए आंखों में सपने सजाए थे। वह भी चाहते थे कि उनका बेटा कामयाब एवं सफल इंसान बने। गोविंद के पिता 2 रोटी कम ही खाया करते थे ताकि उनके बेटे के पढ़ाई में कोई दिक्कत न हो। गोविंद के पिता को एक बार पैर में गंभीर चोट लग गई थी लेकिन वे रुपए बेटे की पढ़ाई में लगाने के लिए रख रहे थे। इसी वजह से उन्होंने अपना उचित इलाज नहीं कराया जिसके वजह से उन्हें टिटनेस हो गया लेकिन कभी भी गोविंद के पिता ने गोविंद से यह बात नहीं बताई।

दवाई के पैसे भी वह गोविंद के पढ़ाई के लिए खर्च के लिए भेज देते। खुद दुःख सह लेते लेकिन बेटे को कभी भी किसी चीज की कमी नहीं होने दी। एक बार बचपन में गोविंद अपने दोस्त के घर गए लेकिन उनके दोस्त के पिता ने उन्हें रिक्शा चालक का बेटा कह कर घर से भगा दिया। गोविंद अपने घर चला गए और उन्होंने यह सारी बात अपने पिता को बताई। उनके पिता ने उन्हें समझाते हुए कहा, “वह बड़े लोग हैं, हम छोटे लोग हैं, हम मजदूरी करते हैं। हमारी पृष्ठभूमि अच्छी नहीं है।” पिता ने जब अपनी पृष्ठभूमि को खराब कहा तो गोविंद ने पूछा कि हमारी पृष्ठभूमि कैसे ठीक होगी? तभी उनके पिता ने कहा कि IAS, IPS बनने के बाद ही हमारी पृष्ठभूमि अच्छी होगी।

इस बातचीत के दौरान गोविंद लगभग 11 वर्ष के थें। कोई सोच भी नहीं सकता था कि 11 वर्ष का कोई बच्चा अपने जीवन में दृढ़ संकल्प ले लेगा। गोविंद ने अपने मन में ठान लिया कि उन्हें एक दिन आईएएस ऑफिसर बनना है। गोविंद 2005 में यूपीएससी की तैयारी करने दिल्ली चला गए। 2007 में उन्होंने बहुत ही कड़ी मेहनत करके यूपीएससी की परीक्षा दी। गोविंद को पहले ही बार मे सफलता हासिल हो गई। गोविंद वर्तमान में सेकेट्टी स्किल डेवलपमेंट और इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जैसे 3 पदों पर पदस्थित है।

गोविंद जी के इस सफलता के पीछे उनके पिता का त्याग और उनके खुद की कड़ी मेहनत है। हमें भी इनकी कहानी से प्रेरणा लेनी चाहिए।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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