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Monday, January 30, 2023

हाय री किस्मत: ‘बाबा का ढाबा’ रेस्टोरेंट हो गया बन्द, फिर से बाबा ढाबा पर आए

बदलाव प्रकृति का सिद्धांत है। दिन के बाद रात और रात के बाद दिन का आना तय है। उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में कभी सुख तो कभी दुःख लगा रहता है। हम आज इसी विषय पर आपको ‘बाबा का ढाबा’ के बारे में बताएंगे जिनका वीडियो वायरल होने के बाद वो फेमस हुए थे। ढाबा के मालिक कांता प्रसाद का अब नया रेस्टोरेंट भारी नुकसान के बाद बंद हो गया है और एक बार फिर वह अपनी पुरानी जगह लौट आए हैं। आगे पढ़िए यह कैसे हुआ।

रातों-रात चर्चा में आए थे कांता प्रसाद।

पिछले साल गौरव वासन ने एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें बाबा का ढाबा के मालिक कांता प्रसाद और बादामी देवी गरीबी और बिजनेस न चलने के कारण रो रहे थे। इसके बाद उनकी किस्मत बदल गई थी और ढाबे पर खाने वालों की लाइन लग गई थी। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग उनकी मदद के लिए भी सामने आए थे।

मदद के बाद खोला था नया रेस्टोरेंट।

लोगों ने बाबा के ढाबे में आकर वहाँ के व्यंजनों का स्वाद चखा और आर्थिक मदद भी की। मदद मिलने के बाद कांता प्रसाद ने ढाबा बंद कर दिल्ली के मालवीय नगर में ही अपना एक रेस्टोरेंट खोल लिया। नए रेस्तरां में बाबा ने एक कुक और एक वेटर रखा था। सुरक्षा के लिहाज से रेस्टोरेंट में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए थे। बाबा की किस्मत चमक गई थी।

नुकसान के बाद बंद हुआ रेस्टोरेंट।

अब यही रेस्टोरेंट भारी नुकसान के बाद बंद हो गया है। रेस्टोरेंट को खोलने के लिए कांता प्रसाद ने करीब 5 लाख खर्च किए थे। वहीं रेस्टोरेंट का मासिक खर्च लगभग 1 लाख रुपये था, जबकि औसत मासिक बिक्री कभी 40,000 रुपये से अधिक नहीं हुई । कांता प्रसाद के खर्चे में 35000 रुपये रेस्टोरेंट का किराया, 36000 रुपये तीन कर्मचारियों की सैलरी और 15 हजार रुपये राशन, बिजली और पानी के लिए शामिल है। रेस्टोरेंट पर धीरे-धीरे ग्राहकों का आना कम होता गया और रेस्टोरेंट का खर्चा बढ़ने लगा। इसके बाद बाबा को अपना रेस्टोरेंट बंद करना पड़ गया।

वीडियो भी देखें

लॉकडा’उन के कारण घाटा।

लॉकडाउन की वजह से एक बार फिर बाबा को गरीबी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि क’रोना की वजह से फुटपाथ पर लोग खाना नहीं खरीद रहे हैं। उनकी बिक्री 3500 रुपये से घटकर सिर्फ 1 हजार रुपये ही रह गई है। उनका आठ लोगों का परिवार है, इतनी कमाई से घर नहीं चल पा रहा है। वह लगातार ग्राहकों की राह देख रहे हैं।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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