17.1 C
New Delhi
Wednesday, February 8, 2023

महज 22 साल की उम्र में बनी IAS अफसर, गरीबों की मदद करना है पहला कर्तव्य

आज के जमाने में महिलाएं कुछ भी कर सकती हैं। महिलाएं पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं। कोई भी ऐसा कार्य नहीं है जो महिला नहीं कर सकती। महिलाएं हर कार्य को बेहतर ढंग से करना जानती है। आज हम ऐसे ही महिला के बारे में जानेंगे जो अपने किए गए नेक कार्यों द्वारा जानी जाती है।

स्मिता तेलंगाना में एक ऑफिसर के पद पर कार्यरत है। स्मिता का जन्म 19 जून 1977 में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में हुआ था। उनके पिताजी कर्नल प्रणब दास सेना अधिकारी है। उनकी मां पूर्वी दास एक गृहणी है। स्मिता एक दबंग टाइप की महिला है। जनता के अधिकारी के नाम से लोग उन्हें जानते हैं। उनका पहला कर्तव्य लोगों की सेवा करना है। स्मिता को युवा आईएएस अधिकारी का खिताब भी मिला है।

स्मिता के पिता के आर्मी में होने के कारण उन्हें कई जगहों पर जाना पड़ा इसीलिए उनकी परवरिश कई दूसरे दूसरे शहरों में हुई है। रिटायर होने के बाद उनके पिताजी अपने अपने परिवार के साथ हैदराबाद में सेटल हो गए। स्मिता ने 12वीं की पढ़ाई हैदराबाद में ही पूरी की और आइएससी मे टॉपर बनी। आगे चलकर उन्होंने कॉमर्स से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की।

स्मिता के माता-पिता ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने के लिए उसे बहुत प्रोत्साहित किया और उन्होंने तैयारी शुरू कर दी। पहली बार में प्री एग्जाम में सफलता नही मिली। 2002 में उन्होंने कठिन परिश्रम किया और दूसरे साल में यूपीएससी की परीक्षा दी। पूरे भारत में यूपीएससी की परीक्षा में 4था रैंक लाने वाली सबसे कम उम्र की भारत की पहली महिला बनी। परीक्षा पास करने के बाद स्मिता ने तेलंगाना कैडर के आईएएस की ट्रेनिंग ली। नियुक्ति के बाद सबकलेक्टर के पद पर चित्तौड़ में रही।

इन्हे लोगो से बहुत लगाव है। लोगो की ये बहुत मदद करती है। उन्होंने अपनी पोस्टिंग के समय बहुत ऐसे कार्य किये जिसपर लोगो ने उन्हें बहुत सराहा। स्मिता अब तक के अपने कार्यकाल में कडप्पा रूरल डेवलपमेंट एजेंसी की प्रोजेक्ट डायरेक्टर, कुरनूल की संयुक्त कलेक्टर और वारंगल की नगर निगम कमिश्नर भी रह चुकी है।

इसके अलावे इनकी पोस्टिंग तेलांगना के वारंगल, विशाखापट्टनम, करीम नगर, चित्तौड़ जैसे शहरों में हो चुकी है। तेलांगना में बहुत सारे ऐसे काम थे जिसे स्मिता ने सुधारा है। बहुत सारे योजनाओं को स्मिता ने पूरा किया है जिसे आज तक किसी ने पूरा नही किया है। हेल्थकेयर सेंटर में उन्होंने ‘अम्माल्लना’ प्रोजेक्ट को शुरू की। इस काम की सफलता के लिए उन्हें प्राइम मिनिस्टर एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। करीम नगर में जब स्मिता डीएम के पद पर थी तो शहर को बेस्ट टाउन के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

स्मिता 2001 बैच की आईएएस अधिकारी महिला है जो तेलांगना की पहली महिला मुखमंत्री कार्यालय में तैनात हुई। इनके पति आईपीएस ऑफिसर डॉक्टर अक्कून सबरवाल है। स्मिता के दो बच्चे है नानक और भुविश। स्मिता अपने काम और लोगो के मदद के कारण सोशल मीडिया पर हमेशा चर्चा में रहती हैं।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

Related Articles

Stay Connected

95,301FansLike
- Advertisement -