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Wednesday, February 8, 2023

हिंदी मीडियम के कारण उड़ता था मज़ाक, व्हीलचेयर पर बैठकर बन गए IRAS अफसर

यदि हम दिल लगाकर मेहनत करें तो जो चाहे वो कर सकते हैं। आजकल हमारे देश में हिंदी बोलने वालों को गंवार समझा जाता है और वहीं अगर कोई दो शब्द अंग्रेजी में बात कर ले तो उससे लोग बहुत प्रभावित होते हैं और उसे पढ़ा लिखा मान लेते हैं। जरूरी नहीं है कि जो हिंदी पढ़ा हो, हिंदी में बात करें उसको ज्ञान ना हो। हिंदी मीडियम वाले बच्चों को सब अंग्रेजी मीडियम वाले बच्चे से कम ही आंकते है। आज हम एक ऐसे कामयाब शख्स के बारे में जानेंगे जो हिंदी मीडियम से पढ़े होने के बावजूद भी आज एक बड़े अफसर के रूप में तैनात हैं।

IRAS आदित्य कुमार झा का जन्म बिहार के मधुबनी जिले के एक छोटे से गांव लखनौर में हुआ था। आदित्य के पिताजी संस्कृत के प्रोफ़ेसर हैं। आदित्य के परिवार में सभी लोग संस्कृत से ही पढ़े हैं और संस्कृत की ज्यादा जानकारी रखते हैं। आदित्य जब 6वीं में थे तब आदित्य के पिताजी ने उन्हें उनके बड़े भाई के साथ आगे की शिक्षा के लिए प्रयागराज (इलाहाबाद) भेज दिया था। आदित्य इलाहाबाद में पढ़ाई करने के साथ-साथ अपने बड़े भाई को यूपीएससी की तैयारी करते देखते थे। आदित्य अपने बड़े भाई को देख कर प्रेरित हुए और सिविल सेवा में जाने का मन बना लिया।

12वीं करने के बाद वह संस्कृत, भूगोल एवं राजनीतिक विज्ञान विषयों से ग्रेजुएशन पूरा किये। आदित्य अपने M.A. की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली चले गये। आदित्य को लोग ताने मारा करते थे क्योंकि वो हिंदी मीडियम से पढ़ाई किए थे, उन्हें लोग गंवार भी कहा करते थे। तैयारी शुरू करने के साथ ही आदित्य को IB में सहायक सेंट्रल इंटेलिजेंस ऑफिसर के तौर पर पद नौकरी मिल गई लेकिन वह IB ज्वॉइन नहीं करना चाहते थे। आदित्य के IB न ज्वाइन करने से आदित्य के पिताजी उनसे नाराज़ हो गए थे। आदित्य 2015 के यूपीएससी की परीक्षा में असफल हो गए पर उन्होंने इस असफलता से हार नही मानकर सीख हासिल की। आदित्य अपने ऑप्सनल विषय में संस्कृत लिए थे। वे सामान्य अध्ययन भी खूब पढ़ा करते थे जिससे उनका प्रदर्शन औसत से भी अच्छा हो गया था। कड़ी मेहनत करके उन्होंने 2016 की UPSC की परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया।

लेकिन दुर्भाग्य से जिस रात उनके मेन्स का रिजल्ट आया, उसी रात करीब 9:00 बजे दुर्भाग्य से उनका पैर फ्रैक्चर हो गया और उनको डॉक्टर ने 2 महीने बेड रेस्ट करने को कह दिया। आदित्य बेड रेस्ट के दौरान ही अपने इंटरव्यू की तैयारी किया करते थे। आदित्य ने अपने फ्रैक्चर को देख कर भी हार नहीं माना और व्हीलचेयर पर बैठकर इंटरव्यू देने का निश्चय किया। आदित्य के इस इंटरव्यू में उनकी बहन ने उनका बहुत साथ दिया। मॉक इंटरव्यू के लिए भी उनकी बहन उन्हें व्हीलचेयर पर बिठा कर ले गई। अंततः आदित्य ने सफलता पाई। उन्होंने जिला बचत अधिकारी के तौर पर जॉइनिंग की। यूपीएससी की परीक्षा पास करने के बाद आदित्य का पूरा परिवार प्रसन्न हो गया। आदित्य का सिलेक्शन दिल्ली एवं अंडमान निकोबार सिविल सेवा में भी हो गया। उनकी इस सफलता में उनकी बहन ने भी उनका बहुत साथ दिया।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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