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Monday, January 30, 2023

पिता चलाते हैं ऑटो, माँ ने बेटी की पढ़ाई के लिए गहने तक बेच डाले, बेटी बन गई बिहार टॉपर

पिता ऑटो चलाते हैं और माँ ने पढाने के लिए अपने गहने तक बेच डाले, बेटी बनी बिहार टॉपर

आज भी गांव में लोग बेटियों को पढ़ाने में कतराते हैं पर आज के युग में बेटियों ने ही अपने माता-पिता अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया है। हम आज बात करेंगे बहुत ही गरीब परिवार में पैदा होने वाली एक लड़की की। उनके पिता भारे ऑटो चलाते थे। पैसे की कमी होने के बावजूद भी”बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट(Bihar board intermediate) मे टॉपर लिस्ट में शामिल होकर एक इतिहास रच दिया।

वह लड़की कौन है:-

कल्पना(Kalpana) बिहार से सटे “रक्सौल नगर परिषद वार्ड 22″के शिवपुरी(shivpuri) टोला में टूटे-फूटे घर में रहती है। कल्पना दो बहन और एक भाई है। उसका भाई जो एयर फोर्स की तैयारी कर रहा है घर में सबसे बड़ा है।”अर्चना”और वह खुद एक साथ पढ रही है। दोनों ने इस साल ही परीक्षा दी थी कामा जिसमें कल्पना (Kalpana) को बिहार में चौथा स्थान वही उसकी बड़ी बहन “अर्चना” को 433 नंबर मिले हैं। कल्पना की माता केवल थोड़ा लिखना पढ़ना जानती है तो वही पिता सातवीं पास है।

गरीबी के बाद भी कल्पना के माता पिता ने कल्पना को पढ़ाया: –

कल्पना जो आज इंटरमीडिएट (Bihar board intermediate) में बिहार टॉप (Bihar top) हुई है उसने उसके माता-पिता की ईमानदारी ने उसे इस मुकाम तक पहुंचाया।कल्पना के माता पिता ने उसे पढ़ाने के लिए अपना गाना बेच दिया लेकिन ट्यूशन की फीस जमा करने के लिए किसी से कर दो तक नहीं मांगी।

कल्पना अपने अच्छे रिजल्ट से खुश हैं:-

बिहार इंटरमीडिएट रिजल्ट में पूरे बिहार में चौथा स्थान लाने का श्रेय कल्पना ने अपने माता पिता को दिया है। कल्पना का रिजल्ट के बाद जब”बिहार तक”(Bihar tak) न्यूज़ चैनल की कल्पना और उसके माता-पिता से बात हुई है तो उनके माता-पिता ने बताया कि वह अपनी बेटी के सफलता से काफी खुश है। वही कल्पना ने बताया कि वह ग्रेजुएशन करने के बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी करना चाहती है। कल्पना का पूरा समाज और रिश्तेदार के तरफ से बधाइयां दी जा रही है।

बाकी गरीब विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक मनी कल्पना:-

गरीबी में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए कल्पना मार्गदर्शक बनी हुई है। उन्होंने असत्य कर दिखाया कि सफलता के लिए मन में लगन होनी चाहिए। सफल होने के लिए गरीबी और अमीरी कोई मायने नहीं रखती है। उनके माता-पिता गरीब होने के बावजूद भी अपने गहने बेचकर उसे पढ़ाया। कल्पना के कामयाबी का श्रेय उसके माता-पिता को जाता है।

आपको इस बेटी के मेहनत कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताएं और साथ ही इस बच्चे का हौसला बढ़ाने के लिए इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि समाज में एक जागरूकता आ सके.

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