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Sunday, January 29, 2023

फेके हुए फूलों को उठाकर शुरू किया अगरबत्ती बनाना, पहले ही साल हुआ लाखों का मुनाफा

बहुत सी ऐसी चीज़ें होती है जिसे लोग बेकार समझते और उसे फेंक देते हैं लेकिन उन बेकार चीजों को किसी न किसी प्रकार से इस्तेमाल में लाया जा सकता है। आज हम आपको रोहित प्रताप (Rohit Pratap) के बारे में बताएंगे, उन्होंने लोगो द्वारा फेके जाने वाले बासी फूलों से अगरबत्ती बनाने का कारोबार शुरू किया।

रोहित प्रताप का परिचय

रोहित प्रताप (Rohit Pratap) हरियाणा (Haryana) के फरीदाबाद के रहने वाले हैं। वह इलेक्ट्रॉनिक (Electronic) से बीटेक (B.tech) करने के बाद क्वालिटी कंट्रोलर (Quality controller) के पद पर एक कंपनी में जॉब करते थे। अपनी अच्छी खासी जॉब को छोड़कर रोहित ने बासी फूलों से अगरबत्ती बनाने का बिजनेस शुरू किया।

तीर्थ स्थलों से शुरू किया काम

तीर्थ स्थल ऋषिकेश में रोहित ने अपना कारोबार की शुरुआत किया। उनका मानना था कि ऋषिकेश देवताओं का स्थल है और इस प्रकार के कारोबार से यह पवित्र स्थल साफ-सुथरा भी हो जायेगा।

इस प्रकार के कारोबार से प्रदूषण कम होगा

रोहित जब भी ऋषिकेश के गंगा घाट पर जाते थे तब गंगा में बासी फूलों को भारी मात्रा देखकर यह सोचा करते थे कि इन बासी फूलों को फिर से इस्तेमाल में कैसे लाया जाए ताकि पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण को रोका जा सके।

जॉब छोड़ शुरू किया कारोबार

रोहित एक बड़ी कंपनी में अच्छी खासी नौकरी छोड़कर बासी फूलों से अगरबत्ती बनाने का कारोबार शुरू किया। उनके इस प्रकार के बेहतरीन कार्य से गंगा नदी के प्रदूषण में कमी आयी तथा तीर्थ स्थल भी साफ़-स्वच्छ हो गया।

Ordinary private limited नाम का कंपनी शुरू किया

इस कार्य को करने के लिए रोहित को सबसे पहले ट्रेनिंग लेनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने इन्फ्राट्रक्चर के लिए बजट का जुगाड़ किया और वर्ष 2019 के अप्रैल में ऋषिकेश में गंगा के किनारे एक किराए का घर लेकर तकरीबन 3 लाख रुपये की लागत से “ओडिनी प्राइवेट लिमिटेड” नाम की एक कंपनी की शुरुआत की, जिसमें खुशबूदार अगरबत्ती बनाने का काम शुरू किया गया।

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भगवान को चढ़ाये गए बासी फूलों से अगरबत्ती बनायी जाती है

गंगा में बहाए जाने वाले फूलों को जमा करने के लिए रोहित ने ऋषिकेश नगर निगम की मदद लिया। रोजाना मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूलों को गंगा में प्रवाहित कर दिया जाता था। लेकिन रोहित की कंपनी की शुरुआत होने के बाद फूलों को प्रभावित करने से रोक दिया गया और फूलों के विक्रेता से भी रोजाना 200 किलो बासी फूल कच्चे माल के रूप में फैक्ट्री में जमा किया जाता है।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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