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Wednesday, February 8, 2023

राजस्थान के छोटे से गांव की बेटी बनी गुजरात की लेडी सिंघम, पढ़िए IPS सरोज कुमारी के जज्बे कहानी

लड़कियां कुछ करने का सोच ले और उनमें हौसला हो कुछ कर दिखाने का तो उन्हें अपने मुकाम हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता। लड़कियां कुछ भी कर सकती है, यह बात हम सुनते आ रहे हैं पर आज हम एक ऐसी लड़की के बारे में जानेंगे जिन्होंने इस बात को साबित कर दिया। आज हम जानेंगे एक ऐसी महिला पुलिसकर्मी के बारे में जिनकी प्रेरणा भरी कहानी जानकर हर लड़की के मन में कुछ कर दिखाने का जोश भर जायेगा।

राजस्थान के झुंझुनू जिले के चिड़ावा तहसील गांव बुडानिया की सरोज कुमारी आईपीएस की ऐसी प्रेरणादायक कहानी है जिसे व्यक्ति अगर एक बार सुन ले तो उसमें कुछ करने का जोश जग जाए। सरोज का जन्म चिड़ावा तहसील के बुडानिया गांव में हुआ था। उन्होंने शुरुआती शिक्षा अपने गांव के एक सरकारी स्कूल से ही प्राप्त की है। ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री जयपुर के कॉलेज से प्राप्त करने के बाद चूरू के सरकारी कॉलेज में एमफिल की।

2010 में उन्होंने यूपीएससी का एग्जाम दिया पर असफल रही लेकिन वह अपने असफलता से हार नहीं मानी और दोबारा 2011 में यूपीएससी का एग्जाम दी और पास कर गई। 2011 से सरोज कुमारी आईपीएस सरोज कुमारी कहलाने लगी। सरोज जनवरी 2016 में गुजरात के बोटाद जिले की एसपी बनीं। सरोज ने उज्ज्वला योजना की शुरुआत की। गधंडा तहसील की कई महिलाओं को जबरदस्ती देहव्यापार में घसीटा जा रहा था। ये बात एसपी सरोज को पता चला तो उन्होंने बिना देरी किए 30 से ज्यादा महिलाओं को इस घिनौने काम से मुक्ति दिलवाया।

एसपी सरोज ने महिलाओं को घर चलाने के लिए सिलाई मशीन भी दिलवाया। एसपी सरोज को गुजरात में लेडी सिंघम नाम से लोग जानने लगे। जो लोग पुलिस डिपार्टमेंट से जुड़े हुए थे और फिरौती और वसूली जैसे अपराध करने में पीछे नहीं हटते थे उन्हें भी एसपी सरोज ने जेल भिजवाया। एसपी सरोज इसके बाद वडोदरा जोन 4 में डीसीपी के पद पर तैनात हो गई। डीसीपी सरोज ने प्लेइंग कार्ड भी लॉन्च किया। प्लेइंग कार्ड के ऊपर एक QR code छपा हुआ है। उस QR code को जब भी बच्चे स्कैन करते हैं उनके मोबाइल फोन पर जागरूकता और बच्चों को हौसले, अफजाई वाले वीडियो चलने लगते है।

सरोज कुमारी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने में लगी रहती है। राजस्थान के एक छोटे से गांव में रहने वाली सरोज कुमारी को तमिलनाडु के गवर्नर माननीय श्री बनवारी लाल पुरोहित ने वूमेन आइकन का पुरस्कार देकर सम्मानित किया। भारत के हर राज्य में उनकी तारीफ सुनने को मिल रही है। सरोज कुमारी की समाज कल्याण की नीति नहीं रुकी। 2020 में जब क’रोना म’हामारी आई तो उन्होंने लोगों की बहुत मदद की और सभी लोगों की मदद हो सके इसके लिए एक योजना भी बनाई।

सरोज कुमारी के इस योजना के तहत गरीब, बेसहारा, कच्ची बस्ती, ओवर ब्रिज के नीचे रहने वाले कई लोगों को, जिनके पास खाना और रहने के सामान उपलब्ध नहीं है उन्हें भोजन पहुंचाया जाता था। उनके इस योजना के तहत 1 दिन में लगभग 1हज़ार से ज्यादा लोगों को पुलिस विभाग की टीम भोजन कराती थी। अलग-अलग जगहों पर पुलिस तैनात कराई गई और जो कोई भूखे, गरीब, बेसहारा दिखते थे उन तक भोजन पहुँचाया जाने लगा। सरोज कुमारी का यह योजना 11 जून 2020 तक ही चला क्योंकि 11 जून के बाद देश में अनलॉक वन की शुरुआत हो गई। जिसके बाद सभी लोग अपने काम पर वापस लौट गए। जिन लोगों के पास कोई काम नहीं था उन लोगों को मास्क बनाने का काम सरोज ने दिया।

मास्क बनाने वाले को रुपए भी दिए जाते थे। सरोज को राष्ट्रीय महिला आयोग की 29वीं स्थापना दिवस पर 31 जनवरी 2021 को दिल्ली के विज्ञान भवन में वीर महिला अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है। सरोज बताती है कि इस महिला अवार्ड की हकदार वह अकेले नहीं है। यह उन सभी पुलिस बहनों के लिए है जो इन कामों में उनकी मदद की है। वह अपने पूरे टीम का शुक्रिया अदा करती है। इस समय सरोज कुमारी सूरत के पुलिस हेड क्वार्टर में डीसीपी पद पर कार्यरत हैं। उनकी यह कहानी सुनकर हर कोई लड़की अपने सपनों का उड़ान भरना चाहेगी। जो कुछ कर दिखाना चाहती है उनको प्रेरणा मिलेगी। एक सरकारी स्कूल से पढ़ी हुई लड़की जो इतनी आगे तक गई, यह प्रेरणादायक कहानी उन बच्चों के लिए भी है जो सोचते हैं कि हम छोटे स्कूल में पढ़ते हैं और कुछ कर नहीं सकते। अगर इरादे बुलंद हो तो हमे स्कूल या अपने आर्थिक स्थिति से कोई फर्क नही पड़ता। हम जो चाहे वो कर सकते है।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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