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Monday, January 30, 2023

हिंदी मीडियम से की पढ़ाई, लोगों ने खूब डराया, फिर भी अपनी लगन से IAS बन गए

हर इंसान अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहता है। लेकिन पहचान बनाने के लिए कुछ अलग करना भी होता है। आज हम जिस शख्स के बारे में जानेंगे उनकी कहानी बहुत ही प्रेरणादायक है।

IAS रवि कुमार सिहाग

IAS रवि कुमार सिहाग का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई एक सामान्य हिंदी मीडियम स्कूल पूरा किया। उनके परिवार में बिल्कुल भी शिक्षा का माहौल नहीं था। रवि बचपन से ही पिताजी के साथ खेतों में जाया करते थे और खेतों में बारीकी के साथ काम का देखरेख करते थे। रवि ग्रेजुएशन करने से पहले खेती से संबंधित सारे कामों की जिम्मेदारी संभालते थे। जब उनके गांव में खेतों से संबंधित कोई समस्या आ जाती थी तो कलेक्टर ऑफिस उन्हें ही जाना पड़ता था और समस्या का हल उन्हे ही ढूंढना होता था।

कलक्टर का पावर देखकर हुए अचंभित

उनके मन में एक दिन विचार आया कि ये कलेक्टर कौन होता है जो हमारी हर छोटी बड़ी समस्या का समाधान करता है? उनको गांव में कई लोग कहा करते थे कि तुम कौन से कलक्टर हो जो इस काम को पूरा कर लोगे। इस तरह की बातें सुनते-सुनते उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद सिविल सेवा में जाने का विचार कर लिया। अब रवि का अगला लक्ष्य था UPSC क्रैक करना। उन्होंने जब UPSC का सिलेबस देखा तो उन्हे लगा कि पहले बेस मजबूत करना चाहिए। बेसिक मजबूत करने के लिए उन्होंने NCERT की किताबों का सहारा लिया।

हिंदी मीडियम के छात्र अंग्रेज़ी मीडियम के छात्रों से कम नहीं

रवि कुमार ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि UPSC परीक्षा एक कंप्लीट पैकेज होता है। इसमें प्री परीक्षा के माध्यम से व्यक्ति को हर तरह से परखा जाता है। यहां तक कि पर्सनालिटी टेस्ट भी इसमें हो जाता है। इस परीक्षा को देने से पहले इसके बारे में सब कुछ जान लेना चाहिए। पढ़ाई का संसाधन सीमित रखना चहिए और उसी को बार बार पढ़ कर रिविजन करना चाहिए। कई प्रतिभागियों को लगता है कि हिंदी मीडियम वालो को अंग्रेजी मीडियम वालों से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है लेकिन यह बात नहीं है। सभी को मेहनत करनी पड़ती है। ऐसी बाते सोचने से प्रतिभाओं का हौसला कम हो जाता है।

2018 में क्रैक किया UPSC

रवि हिंदी मीडियम से थे फिर भी वे UPSC अच्छे नंबर से पास हुए। रवि 2018 में हिंदी माध्यम के प्रतिभागियों में टॉपर बने। उनका कहना है कि परीक्षा उतना भी मुश्किल नहीं होता जितना लोग परीक्षा के बारे में भ्रम फैलाते हैं। अगर दृढ निश्चय करके सही दिशा में आगे बढ़ें तो सफलता हमे अवश्य मिलेगी।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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