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Monday, January 30, 2023

5 बार असफल हुईं, सबने छोड़ दी थी उम्मीद, फिर भी मेहनत की और 6ठी बार में बनीं IAS

स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं कि जीवन में एक ही लक्ष्य बनाओ और दिन-रात उसी लक्ष्य के बारे में सोचो। स्वप्न में भी तुम्हें वही लक्ष्य दिखाई देना चाहिए। हर मनुष्य के जीवन में लक्ष्य का होना बहुत जरूरी है। लक्ष्य के बिना मनुष्य का जीवन व्यर्थ होता है।

वास्तव में असली जीवन उसी का है जो परिस्थितियों को बदलने का साहस रखता है और अपना लक्ष्य निर्धारित करके अपनी राह खुद बनाता है। आज की यह कहानी असफलताओं से सीख लेकर सफलता प्राप्त करने वाली एक ऐसी लड़की की है जिसने अपने आखिरी प्रयास में यूपीएससी के एग्जाम को पास कर अपने लक्ष्य को प्राप्त किया।

जानिए नूपुर गोयल की कहानी

नूपुर गोयल अपने माता पिता और छोटे भाई के साथ दिल्ली के नरेला में रहती हैं। उनके पिता एक व्यवसायी हैं और माँ गृहणी हैं। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई नरेला से ही पूरी की है जिसके बाद उन्होंने DTU दिल्ली से B.Tech. की डिग्री हासिल की। नूपुर ने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में MA की डिग्री भी प्राप्त की है।

सिविल सेवा में क्यों गई नुपुर?

नूपुर अपने चाचा से प्रेरित थीं, जो कभी यूपीएससी (UPSC) की तैयारी कर चुके थे। हालांकि वो क्वालिफाई नहीं कर पाए थे। उन्होंने नूपुर को यह रास्ता अपनाने का हिम्मत दिया। इंजीनियरिंग के अपने अंतिम वर्ष में निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों की दुनिया से परिचित होने के बाद, नूपुर ने कॉलेज परिसर में बैठने के बजाय यूपीएससी यानि की IAS परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया। नूपुर ने 2014 के स्नातक स्तर की पढ़ाई में अपना पहला प्रयास किया और प्रीलिम्स और मेन क्वालिफाई किया, लेकिन इंटरव्यू क्वालिफाई नहीं कर सकीं।

लगातार असफल हुईं।

2015 में नूपुर अपने दूसरे प्रयास को शुरू भी नहीं कर सकीं। फिर से अपने तीसरे प्रयास में बहुत अच्छे मार्जिन के साथ प्रीलिम्स और मेंस दोनों क्वालिफाई कर लिया। हालांकि, 2016 में उनका साक्षात्कार बहुत अच्छा नहीं रहा और वह फिर से क्वालीफाई नहीं कर पाईं। 2017 में अपने 4थे प्रयास में वह प्रीलिम्स क्लियर नहीं कर पाई थीं। उन्होंने खूब तैयारी की और 2018 के अपने 5वें प्रयास में प्रिलिम्स और मेंस दोनों में पास हो गईं। दुर्भाग्य से वो इस बार भी साक्षात्कार में असफल रहीं।

अंततः सपनों को साकार किया।

नूपुर ने अपने सपनों का पीछा करना जारी रखा और आखिरकार अपने छठे और अंतिम प्रयास 2019 की सिविल सेवा परीक्षा में 11 वीं रैंक हासिल की। यह उसकी मानसिक शक्ति का एक वसीयतनामा है जिसे वह अपने सामने आने वाली बाधाओं के बावजूद लगातार निभाती रही।

असफलताओं से घबराएँ नहीं

कभी भी हमें असफलताओं से नहीं घबराना चाहिए और खुद पर भरोसा रखना चाहिए। आपको अपने परिवार का साथ मिलेगा तो आप और भी बेहतर करने के लिए प्रेरित होंगे। आप यूपीएससी की तैयारी के लिए रणनीति बनाएं और उसमें जुट जाएं। जब भी आपको असफलता मिले तो उसके बाद यह जरूर देखें कि कोई कमी कहां रह गई। दूसरे प्रयास में अपनी कमियों को सुधारें और बेहतर करें।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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