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Sunday, January 29, 2023

माउंट एवरेस्ट की उंचाई भी नहीं रोक पाई! 5 दिनों में 2 बार की चढ़ाई, पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया

सपने देखने और उसे पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती। अगर आपके अंदर कुछ कर दिखाने का जज़्बा है तो आपके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है। इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं अरूणाचल प्रदेश की रहने वाली अंशु जामसेनपा। जिन्होंने 41 वर्ष की उम्र में 1 बार नहीं बल्कि 5 बार माउंट एवरेस्ट को फतह करने का कारनामा कर भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। यही नहीं वह एक सीज़न में 2 बार माउंट एवरेस्ट चढ़ने का भी हैरत अंगेज कार्य कर चुकीं हैं। अंशु एक ही सीजन में दो बार माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने वाली पहली महिला पर्वतारोही भी हैं। अंशु को इस उपलब्धि के लिए भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च सम्मान में से एक पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा है। माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई चढ़ना और साथ में घर-परिवार की जिम्मेदारी बखूबी निभाना अंशु जामसेनपा के लिए इतना आसान नहीं था। इस बीच उन्हें कई बार मौ’त का भी सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आइए जानते हैं उनके संघर्ष और सफलता का प्रेरणादायी सफर।

कम उम्र में शादी होने के बाद भी सपने देखना नहीं छोड़ा

अरूणाचल प्रदेश के दिरांग में जन्मी अंशु के पिता इंडो तिब्बत बॅार्डर पर पुलिस ऑफिसर हैं और मां नर्स हैं। अंशु जामसेनपा जब स्कूल में पढ़ रहीं थी। तभी कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी गई। अक्सर जहां लड़कियां शादी के बाद खुद के सपनों को भूला देती हैं, वहीं अंशु जामसेनपा ने अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया। बेटियां होने के बाद उन्होंने अपने लिए कुछ करने की ठानी। इसी बीच साल 2008 में उनके यहां एक कैंप लगा था। जिसमें कई माउंटेनियर आए थे। वह भी कैंप में शामिल हुई थी। उन्होंने कई एक्टिविटीज में भाग लिया। वहां आए माउंटेनियर्स ने उनकी फिटनेस और एक्टिविटी को देखते हुए उन्हें माउंटेनियरिंग में आने के लिए कहा। जिसके बाद उनके मन में भी पहाड़ों पर चढ़ने का ख्याल पनपने लगा।

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पहाड़ चढ़ने के लिए बेच दी जमीन

अंशु जामसेनपा ने पर्वतारोही बनने की ठान ली थी। उस समय उनकी दोनों बेटियां छोटी थीं और उनके पति काम के सिलसिले में अक्सर बाहर ही रहते थे। इसलिए बेटियों को संभालने की जिम्मेदारी भी उन पर ही थी। अंशु जामसेनपा ने अपनी दोनों बेटियों को बोर्डिंग स्कूल भेज दिया ताकि उनकी पढ़ाई अच्छी तरह से हो सके। 2009 में अंशु ने माउंटेनियरिंग की प्रोफेशनल ट्रेनिंग शुरू कर दी। पहले बेसिक कोर्स किया फिर एडवांस कोर्स किया।2011 में उनकी पहली समिट थी। तब उनके पास पैसों की दिक्कत खड़ी हो गई। कम से कम 25 लाख रुपए चाहिए थे। कुछ मदद तो सरकार से मिल गई थी लेकिन बाकी पैसे खुद ही जुटाने थे। इसलिए उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन बेच दी। उससे मिले पैसों से उन्होंने फीस भर दी और ट्रेनिंग शुरू की।

पहले ही प्रयास में कर लिया एवरेस्ट फतह

अंशु जामसेनपा ने अपने पहले ही प्रयास में माउंट एवरेस्ट को फतह कर इतिहास रच दिया। वह कहती हैं कि इसके पीछे बड़ा कारण यह था कि वह छोटी सी उम्र से ही ट्रैकिंग किया करती थी। वह हर रोज सुबह 4 बजे उठकर दौड़ने लग जाती थी। एक दिन में कम से कम दस किलोमीटर दौड़ना आम बात थी। सुबह-शाम दो-दो घंटे प्रैक्टिस किया करती थी। इस दौरान बेटियों की भी बहुत याद आती थी, लेकिन हमेशा उनसे मिलना नहीं हो पाता था। फिर भी वह पूरी मेहनत से अपने सपनों को पूरा करने में जुटी रहीं।

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एवरेस्ट पर चढ़ाई करने के बाद मुड़कर नहीं देखा पीछे और रच दिया इतिहास

पहली ही बार में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली अंशु जामसेनपा ने एक बार शुरुआत करने के बाद फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह कहती हैं कि पहली बार एवरेस्ट फतह करने पर उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे वह ईश्वर के करीब पहुंच गई हैं। उनका कई बार मौत से सामना हुआ है। कई बार उन्हें ट्रैकिंग के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। लेकिन अंशु जामसेनपा ने हार नहीं मानी। यही कारण हैं कि उन्होंने 2011 में दो बार, 2013 में एक बार और 2017 में फिर दो बार एवरेस्ट फतह किया। 2017 में महज 5 दिन के अंदर उन्होंने दो बार एवरेस्ट फतह किया। ऐसा किसी महिला ने दुनिया में पहली बार किया था। उन्होंने पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है।

बेटियों को भी बनाना चाहती हैं माउंटेनियर

अंशु जामसेनपा की दोनों बेटियां अब बड़ी हो चुकीं है। वह चाहती हैं कि उनकी तरह ही उनकी बेटियां भी देश का नाम रोशन करें। वह दोनों भी अगर चाहें तो माउंटेनियर बन सकती है। यही नहीं अंशु जामसेनपा अन्य लड़कियों के लिए कहती हैं कि जो लड़कियां माउंटेनियर बनना चाहती हैं। उन्हें यही कहना चाहूंगी कि सिर्फ ग्लैमर को देखकर पहाड़ चढ़ने का मत सोचो। इसके लिए आपमें जुनून होना बहुत जरूरी है। क्योंकि बहुत सारी दिक्कतें आती हैं, लेकिन जब हमारा इरादा बहुत मजबूत होता है तो हम उन्हें हराते चले जाते हैं।

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सरकार ने किया पद्मश्री से सम्मानित

5 दिन में दो बार एवरेस्ट फतह करने वाली अंशु जामसेनपा के कार्य और उनकी मेहनत को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान में से एक पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है। अंशु जामसेनपा इसके साथ ही कई अवार्ड्स से भी सम्मानित हो चुकी हैं।

5 बार माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली अंशु जामसेनपा आज सही मायने में लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत है। 41 वर्ष की उम्र में 2 बार उन्होंने लगातार एवरेस्ट फतह कर अपनी सफलता की कहानी लिखी है। आज वह कई लोगों को प्रेरित कर रही हैं।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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