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Monday, January 30, 2023

छिन गई आंखों की रोशनी पर नहीं छिना हौसला, जानिए प्रांजल कैसे बनी देश की पहली नेत्रहीन IAS

सपने देखने के लिए सिर्फ आंखे नहीं बल्कि हौसलों की भी जरूरत होती है। अगर आपके हौसलों में जान हैं तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं महाराष्ट्र के उल्लासनगर की रहने वाली 28 वर्षीय प्रांजल पाटिल। 6 साल की उम्र में आंखों की रौशनी खोनेवाली प्रांजल, भारत की पहली नेत्रहीन महिला आईएएस ऑफ़िसर बन गई हैं। उनकी नियुक्ति केरल कैडर में की गई है। प्रांजल ने 14 अक्टूबर को तिरुवनंतपुरम में सब कलेक्टर का कार्यभार संभाला था। एक समय था जब प्रांजल के नेत्रहीन होने के कारण रेलवे ने उन्हें नौकरी देने से मना कर दिया था। लेकिन आज IAS ऑफिसर बनकर उन्होंने सफलता की नई कहानी लिखी है। नेत्रहीन होने के बाद IAS बनने का सफर तय करना प्रांजल पाटिल के लिए इतना आसान नहीं था। आइए जानते हैं उनके जीवन के संघर्ष से सफलता तक का प्रेरणादायी सफर।

रेलवे ने नौकरी देने से कर दिया था इन्कार

महाराष्ट्र के उल्लासनगर की रहने वाली प्रांजल पाटिल 6 वर्ष की उम्र में ही नेत्रहीन हो गयी थी। उनकी दृष्टहिनता की वजह से भारतीय रेलवे ने उन्हें नौकरी देने से मना कर दिया था। साल 2016 में प्रांजल ने यूपीएससी में 773वां स्थान हासिल किया था। तब उन्हें इंडियन रेवेन्यू सर्विस में नौकरी करने का प्रस्ताव दिया गया। लेकिन ट्रेनिंग के दौरान उन्हें नौकरी देने से इनकार कर दिया गया था। प्रांजल इस बात से दुखी तो हुईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। और साल 2017 में फिर से परीक्षा देकर 124वां स्थान हासिल किया। अब वह उप ज़िलाधिकारी बन गईं हैं।

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इस घटना के बाद चली गई थी आंखो की रौशनी

प्रांजल के आंखों की रौशनी स्कूल में घटी एक घटना के बाद चली गई थी। प्रांजल जब छह साल से कम उम्र की थीं, तब स्कूल में ही एक बच्चे ने उनकी एक आंख को पेन्सिल से घायल कर दिया। उस आंख की रौशनी चली गई। डॉक्टर ने उनके माता-पिता को बताया कि दूसरी आंख की रौशनी भी जा सकती है और ऐसा ही हुआ। कुछ दिनों में ही प्रांजल ने अपनी दोनों आंखें खो दीं। हालांकि प्रांजल की आंखों ने भले ही अपनी रौशनी खो दी थी। लेकिन उन्होंने अपने सपनों को धूंधला होने नहीं दिया।

बचपन से ही पढ़ाई में थी रुचि

प्रांजल ने मुंबई के दादर में स्थित श्रीमती कमला मेहता स्कूल से ब्रेल लिपि में अपनी पढ़ाई पूरी की थी। इस स्कूल से 10वीं पास करने के बाद प्रांजल ने चंदाबाई कॉलेज से 12वीं और सेंट ज़ेवियर कॉजेल से आर्ट्स में ग्रैज़ुएशन किया। ग्रैज़ुएशन में ही उन्हें पहली बार यूपीएससी की परीक्षाओं के बारे में पता चला। उसके बाद से आईएएस बनने का सपना उनके दिल में पलने लगा। जिसके बाद अपने सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने दिल्ली का रूख किया। यहां उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से एमए, एमफ़िल और पीएचडी की पढ़ाई पूरी की।

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यूपीएससी की तैयारी करने के लिए खास तकनीक से की पढ़ाई

अपनी पीएचडी की पढ़ाई पूरा करने के साथ-साथ प्रांजल ने यूपीएससी परीक्षाओं की तैयारी भी की। यूपीएससी की तैयारी करने के लिए प्रांजल ने एक ख़ास तरह के स्क्रीन रीडर सॉफ़्टवेयर की मदद ली थी। यह सॉफ़्टवेयर सुनने और देखने में असक्षम लोगों के लिए तैयार किया गया है। प्रांजल बताती हैं कि वह पहले किताबों को स्कैन करके कम्प्यूटर में अपलोड करतीं हैं, उसके बाद सॉफ़्टवेयर की मदद से उसे सुनतीं थी। हालांकि यह सब उनके लिए आसान बिल्कुल नहीं था। क्योंकि इतनी लंबी प्रक्रिया के चलते कभी-कभी उन्हें चिढ़ भी होती थी। पर उन्होंने कभी अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी और IAS बनकर ही दम लिया।

ऐसे बनी IAS ऑफिसर

प्रांजल ने आईएएस परीक्षा देने के पहले और भी कई प्रतियोगी पीरक्षाओं की तैयारी भी की और परीक्षाएं भी दी लेकिन उनका मन नहीं भरा। उनका मकसद कुछ और ही था। उन्होंने आईएएस बनने की ठानी और तन-मन से तैयारियों में जुट गयीं। नतीजा यह हुआ कि पहले ही प्रयास में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा क्लियर कर ली। लेकिन 2016 की इस परीक्षा में मिलने वाली रैंक से वह संतुष्ट नहीं हुई। इस समय उन्हें 733 रैंक मिली थी। और इसके अंतर्गत मिलने वाले पद में उन्हें रुचि नहीं थी। उन्होंने दोबारा साल 2017 में प्रयास किया और 124 वीं रैंक के साथ परीक्षा पास कर ली। उन्होंने जो ठाना था वह पूरा करके दिखाया। वर्तमान में प्रांजल केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में पोस्टेड हैं।

प्रांजल पाटिल ने अपनी कमजोरियों को अपनी ताकत बनाकर सफलता की नई कहानी लिखी हैं। प्राजंल पाटिल उन लोगों के लिए एक मिसाल बन कर उभरी हैं जो शारीरिक कमजोरी या डि’सएबिलिटी के कारण आगे बढ़ने का नहीं सोचते। प्रांजल ने कभी खुद को डि’सएबल माना ही नहीं बल्कि स्पेशली एबेल्ड माना। तभी शायद इतनी चुनौतियों के बाद भी उन्होंने मुड़कर नहीं देखा। आज प्रांजल लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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