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Wednesday, February 8, 2023

UPSC में बढ़िया रैंक लाने का जुनून क्या होता है, इस अफसर की कहानी से समझिए

इस दुनिया में शायद ही कोई ऐसा होगा, जिसने अपने जीवन मे कोई सपना न देखा हो। सपने तो सभी के होते है चाहे वह प्रधानमंत्री बनने का हो या फिर कोई सरकारी नौकरी का। मतलब यह है कि सबके लिए सफलता का मतलब अलग-अलग होता है। सपने और सफलता इन दोनों का आपस मे घनिष्ठ संबंध होता है। उदाहरण के लिए, किसी का IAS बनने का सपना होता है और तो उस इंसान को सफलता भी उसी रूप में मिलती है। लेकिन सफलता और सपने कुछ परिस्थितियों मे अगल-अलग हो सकते है। आज हम आपको एक ऐसी ही महिला के बारे में बताएंगे जिन्होंने अपने सपनों को पूरा किया। पहले IIT फिर IPS और अंततः अपने अटूट मेहनत से UPSC में अच्छे रैंक लाकर बनी IAS अधिकारी।

आइये आपको मिलाते हैं निधि बंसल से।

निधि बंसल मध्य प्रदेश की रहने वाली हैं। इनका परिवार मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के कैलारस कस्बे में रहता था। फिर यहां से ग्वालियर शिफ्ट हो गया। 10 दिसम्बर 1990 को जन्मी निधि की शुरुआती शिक्षा ग्वालियर से हुई। वर्ष 2011 में एनआईटी त्रिची तमिलनाडू से कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग से बीटेक की डिग्री हासिल की। इनके पिता गिरीराज बंसल लोहे के व्यापारी हैं। मां हाउसवाइफ हैं। निधि बंसल ने UPSC परीक्षा के कुल पांच अटेम्ट दिए. दो में वे IPS तक पहुंची और अंतिम पांचवें अटेम्पट में उन्होंने IAS बनने का अपना सपना सच कर दिखाया।

UPSC के लिए जॉब छोड़ा।

बीटेक करने के बाद निधि बंसल ने वर्ष 2013 में बेंगलुरु स्थित एमएनसी में अच्छे पैकेज पर बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी जॉइन की। इस जॉब से निधि पूरी तरह संतुष्ट थी, मगर निधि को लगता था कि सिर्फ कम्प्यूटर के आगे बैठकर नौकरी करने की बजाय लोगों से सीधा जुड़ाव वाले पेशे में जाना चाहिए। दोस्तों ने यूपीएससी की तैयारी का सुझाव दिया तो छह माह बाद ही नौकरी छोड़कर बेंगलुरु से दिल्ली आ गईं।

पहले IPS बनीं और फिर IAS.

आईएएस ऑफिसर बनना निधि का का सपना था। वर्ष 2016 में दूसरे प्रयास में वह आईपीएस में चयनित हुई। वर्ष 2017 में तीसरे प्रयास में भी आईपीएस में ही चयनित हो सकी। जब उन्होंने चौथी बार प्रयास किया तो उनका फाइनल सूची में नाम तक नहीं था। दो बार आईपीएस बनने के बाद फाइनल सूची में नहीं पहुंच पाने से उन्हें धक्का लगा । पांचवीं बार पुन: दोगुनी ऊर्जा के साथ प्रयास किया और उन्हें सफलता मिली। यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम में 23वीं रैंक हासिल कर आईएएस में चयनित हुई।

इस तरह कह सकते है कि आपने जो लक्ष्य तय किया है, उसे हासिल करने के लिए आपको बहुत कुछ छोड़ना पड़ता है। लेकिन जब सफलता मिलती है तो इन सभी चीजों का आनंद दोगुना हो जाता है। युवाओं के लिए असफलता के बाद भी सफलता के द्वार खुले रहते हैं।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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