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Tuesday, November 30, 2021

पिता थे सेक्युरिटी गार्ड, बेटे ने दूसरों से किताबें माँग कर की पढ़ाई, और बन गए IAS अफसर

मां-बाप हमेशा अपने बच्चों को सफल देखना चाहते हैं, चाहे इसके लिए उन्हें कोई भी सितम क्यों ना उठाना पड़े। आज हम आपको आईएएस ऑफिसर कुलदीप द्विवेदी (IAS officer Kuldeep Dwivedi) के बारे में बातएगें, वह अपने जीवन में आने वाली सभी कठिन परिस्थितियों से लड़ कर अपने पिता का सपना पूरा किया। आइये जाने आईएएस कुलदीप द्विवेदी की सफलता की कहानी (Success story of IAS Kuldeep Dwivedi)

आईएएस कुलदीप द्विवेदी (IAS Kuldeep Dwivedi) उत्तर प्रदेश के राय बरेली के रहने वाले है। उनके पिताजी सूर्यकांत द्विवेदी हमेशा से चाहते थे कि उनका बेटा एक अफसर बने। सूर्यकांत लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow university) में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर कार्यरत थे। वह एक गार्ड की छोटी सी नौकरी करते हुए भी अपने बेटे को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे।

बेटे को सरकारी अफसर बनाने का देखते थे सपना

कुलदीप द्विवेदी के पिता ने जब लखनऊ विश्वविद्यालय में सिक्योरिटी की नौकरी ज्वाइन की थी तब उनकी मासिक आय मात्र 1100 रुपये था। उनके परिवार में 6 सदस्य थे। परिवार का सारा खर्चा उनके पिता के सर पर ही था। कम आमदनी की वजह से परिवार में आर्थिक तंगी लगी रहती थी। मासिक आमदनी कम होने के कारण परिवार चलाना मुश्किल था। इसीलिए सूर्यकांत गार्ड की ड्यूटी करने के बाद थोड़ा समय बचा कर खेती का काम भी करने लगे। कम पढ़े-लिखे होने के कारण उनको दूसरी और अच्छी नौकरी भी मिल नहीं पा रही थी। तभी से उन्होंने अपने बेटे को पढ़ा लिखा कर सरकारी अफसर बनाने का सपना देखा था।

बेटे पर गर्व महसूस हुआ

सूर्यकांत को सबसे अधिक खुशी तब हुई जब उनका छोटा बेटा कुलदीप द्विवेदी सरकारी अफसर बने। आर्थिक तंगी के कारण कुलदीप ने अपनी प्राथमिक और उच्च शिक्षा गांव के एक स्कूल में पूरी की इसके बाद कुलदीप ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से 2009 में हिंदी विषय में B.A की डिग्री प्राप्त किए तथा उसी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से भूगोल में M.A की उपाधि प्राप्त किया। अपने पिताजी के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दिया।

दोस्तों से किताब लेकर पढ़ते थे

घर के हालात ठीक नहीं होने की वजह से घर से उन्हें कम पैसे दिए जाते थे जिसके कारण उनका किताब खरीदना भी संभव नहीं हो पा रहा था। इसीलिए अपने दोस्तों से किताब मांग कर अपनी पढ़ाई पूरी करते थे।

दो बार असफल होने पर भी हार नहीं माने

कुलदीप पहली बार यूपीएससी परीक्षा की प्रिलिम्स भी क्लियर करने में असफल रहे। उन्होंने अपने इस असफलता से हार नहीं माना एवं अगली प्रयास में जुट गए। इस बार भी भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया और वह यूपीएससी की परीक्षा में असफल रहे। दूसरी प्रयास में प्रिलिम्स में वह अटक गए। लगातार दो बार असफल होने पर उनका दो वर्ष का समय एवं आर्थिक स्थिति दोनों ही बुरी तरह प्रभावित हुई।

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तीसरी प्रयास में मिली सफलता

लगातार दो बार सफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी एवं अपनी अगली प्रयास में तेज़ी से जुट गए। कुलदीप अपने तीसरे प्रयास में वर्ष 2015 के यूपीएससी परीक्षा में 24वां रैंक के साथ अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने में सफल रहे। यूपीएससी में सफल होने के बाद उन्हें “इंडियन रेवेन्यू सर्विस” के लिए चयनित किया गया। कुलदीप अपने पिता की आर्थिक स्थिति समझते हुए अपने पिता के सपनों को पूरा किया। कुलदीप यूपीएससी के परीक्षार्थियों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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