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Tuesday, November 30, 2021

पैसे न होने के कारण 4 महीने तक प्लेटफार्म पर ही कि पढ़ाई, आज अपनी मेहनत से बन गए है IAS अफसर: M Shivaguru Prabhakaran

कामयाबी की पथ पर ढेरों बाधाए आती है लेकिन इन सभी बाधाओं को झेलते हुए आगे बढ़ना ही सफलता हासिल होती है। आज हम आपको आईएएस अफसर एम. शिवगुरु प्रभाकरण (IAS officer M Shivguru prabhakaran) के बारे में बातएगें, जिन्होंने मजदूरी करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी और कठिन परिश्रम के बदौलत आईएएस अधिकारी बन गए। (Success story of IAS officer M. Shivguru prabhakaran)

बचपन से ही करना पड़ा संघर्ष

आईएएस ऑफिसर एम शिवगुरु प्रभाकरण (IAS officer M Shivguru prabhakaran) तमिलनाडु के रहने वाले हैं। उन्हें अपने जीवन में बहुत सारे कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनके पिताजी को शराब की आदत थी, जिसके वजह से उन्हें पैसे की कमी होती थी। उनके सर पर छत तक नहीं था, सुख सुविधा तो दूर की बात है। खाना भी उन्हें बेहद मुश्किल से मिलता था। ऐसे हालात में भी पढ़ाई करना बहुत बड़ी बात है। किसी तरह प्लेटफार्म पर ही उन्होंने अपने रहने का बंदोबस्त किया था।

बुरे हालात में भी था पढ़ने का शौक

बुरे हालात होते हुए भी उन्हें पढ़ने की काफी इच्छा थी। किसी तरह से अपनी पढ़ाई करते थे। बचपन में ही उनके परिवार की जिम्मेदारी उन पर आ गई थी। पढ़ने में दिलचस्पी होने के कारण बुरे हालातों में भी कुछ समय निकाल कर पढ़ लेते थे। जब वह बड़े हुए तब उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए पैसों की जरूरत आन पड़ी लेकिन उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर सके इसीलिए उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ कर खेत में मजदूरी और आरा मशीन में लकड़ी काटने का काम करने लगे। लेकिन प्रभाकरण ने अपनी उम्मीदों का दामन कभी नहीं छोड़ा। अपने घर की जिम्मेदारी निभाते हुए वर्ष 2008 में अपने छोटे भाई को इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवाएं एवं अपनी बहन की शादी किए।

प्लेटफार्म को बनाया आश्रय

अपनी जिम्मेदारियों को निपटाने के बाद उनके सामने अब सिर्फ उनका सपना था। उनकी इच्छा आईआईटी (IIT) में दाखिला लेना था और चेन्नई जाकर कोचिंग भी लेनी थी इसके लिए उन्हें पैसे की आवश्यकता थी। खुद पर भरोसा रखने वालो की भगवान भी मदद करते हैं। प्रभाकरण को अपने एक दोस्त से “सेंट थॉमस माउंट” के बारे में जानकारी मिली, वहाँ बच्चों को निशुल्क पढ़ने की सुविधा थी फिर उन्होंने चेन्नई जाने का फैसला लिया और वह हस “सेंट थॉमस माउंट” चले गए और वहां उनका दाखिला भी हो गया लेकिन वहां रहने के लिए उन्हें एक कमरे की आवश्यकता थी मगर उनके पास इतने पैसे नहीं थे, इस कारण उन्होंने रेलवे प्लेटफार्म को ही अपना आश्रय बना लिया।

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एमटेक में टॉपर रहे

रेलवे प्लेटफार्म पर 4 महीने बिताने के बाद एक छात्र ने प्रभाकरण की मदद की और वह उसके साथ रहने लगे। विकट परिस्थितियों से हारना उन्होंने नहीं सीखा था और हमेशा आगे बढ़ने का प्रयास करते रहते थे। आईआईटी (IIT) में उन्हें दाखिला मिला और बीटेक (B.tech) करने के बाद प्रभाकरण एमटेक (M.tech) में टॉपर रहे।

बनना चाहते थे आईएएस

प्रभाकरण यूपीएससी (UPSC) परीक्षा पास करके आईएएस (IAS) ऑफिसर बनना चाहते थे। यूपीएससी के परीक्षा में उन्हें दो बार असफलताओं का सामना भी करना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं माना एवं अपने अथक प्रयास में जुटे रहे। आखिरकार उनकी किस्मत पलटी और वर्ष 2017 में यूपीएससी की परीक्षा में उन्होंने 101वां रैंक प्राप्त हुआ।

प्रभाकरण ने अपने जीवन में आने वाले कठिन परिस्थितियों से लड़कर अपने लक्ष्य को पूरा किया। निरंतर प्रयासों के बावजूद ही उन्हें अपने मंजिल हासिल हुई।

Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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