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Wednesday, February 8, 2023

बेटे की पढ़ाई के लिए पिता ने अपना मकान तक बेच दिया, आज बेटा है IAS अफसर

‘’लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’’। यह पंक्तियां IAS ऑफिसर बने 21 साल के प्रदीप सिंह के जीवन पर एकदम सटीक बैठती हैं। मगर उनके IAS बनने का सफर इतना आसान नही था। आइए पढ़ते है उनके संघर्ष की कहानी।

प्रदीप को पढ़ाने के लिए उनके पिता ने अपना घर तक बेच दिया

साल 2019 की यूपीएससी सीएसई परीक्षा में 26वीं रैंक लाने वाले प्रदीप ने IAS ऑफिसर बनने तक हार नहीं मानी। उनकी पढ़ाई पूरी कराने और अच्छी कोचिंग दिलाने के लिए प्रदीप के पिता ने अपना मकान तक बेच दिया। जिसके बाद प्रदीप कोचिंग करने दिल्ली आए। अपने पहले अटेम्प्ट में ही उन्हें 93वीं रैंक प्राप्त हुई थी, लेकिन IAS सेवा पाने के लिए प्रदीप ने फिर से कोशिश की। और मैदान में कूदे जिसके बाद आखिरकार उन्हें सफलता प्राप्त हुई। उन्हें IAS की परीक्षा में 26वीं रैंक प्राप्त हुई। एक साधारण परिवार से IAS ऑफिसर बनने तक का सफर तय करना प्रदीप सिंह के लिए इतना आसान नहीं था।

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पिता करते हैं पेट्रोल पंप पर काम और बेटा बना IAS ऑफिसर

प्रदीप सिंह मूल रूप से बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं। लेकिन वर्तमान में इनका परिवार मध्य प्रदेश के इंदौर में रहता है। प्रदीप जब पांच साल के थे तब उनका परिवार गोपालगंज से इंदौर आकर रहने लगा था। प्रदीप सिंह के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके पिता मनोज पेट्रोल पम्प पर काम किया करते थे। मां हाउस वाइफ है। जबकि प्रदीप के भाई निजी कम्पनी में काम करते हैं। प्रदीप के दादा जी की अंतिम इच्छा थी कि उनका पोता सिविल सर्विसेज में जाकर देश की सेवा करे जिसके बाद प्रदीप ने IAS ऑफिसर बनने की ठान ली।

बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थे प्रदीप

प्रदीप सिंह बचपन से ही होनहार थे। उन्होंने 10वीं और 12वीं की परीक्षा 81 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की। इसके बाद आईआईपीएस डीएवीवी इंदौर से उन्होंने कॉमर्स विषय में ग्रेजुएशन किया। प्रदीप ने इंदौर में स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सर्विसेस की तैयारियां शुरू कर दी थी। प्रदीप तैयारी के लिए दिल्ली आना चाहते थे, मगर परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। ऐसे में पिता ने घर बेचकर बेटे को कोचिंग करवाई। परीक्षा के दौरान उनकी मां की तबीयत भी बिगड़ गई थी। पर इसका प्रदीप की परीक्षा पर कोई असर न हो इसलिए उनके पिता ने इस बात की उन्हें भनक तक नहीं होने दी। प्रदीप ने मन लगाकर तैयारी की और सफलता प्राप्त की।

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आखिरकार मेहनत लाई रंग और बन गए IAS ऑफिसर

प्रदीप की डेढ़ साल की कड़ी मेहनत आखिरकार रंग लाई और उनका UPSC में चयन हो गया। प्रदीप की रैंक 93 आई थी। उन्हें IRS में काम करने का अवसर मिला था। लेकिन प्रदीप IAS ऑफिसर बनना चाहते थे। इसलिए उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दोबारा से परीक्षा की तैयारी करने लगे। प्रदीप ने जनरल स्टडी और ऑप्शनल तीनों पर फोकस किया और उनमें अंक बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रयास शुरू किए। अपनी पहले साल की गलतियों पर भी काम किया और जहां कोई भी छोटी-बड़ी कमी थी उसे सुधारा। अपने सीनियर्स की सलाह ली और यह पूछा कि कहां कमी है। और उस सब पर काम किया। प्रदीप ने साक्षात्कार के लिए भी इस बार बहुत मेहनत की और आखिरकार दूसरे ही प्रयास में उन्हें अच्छी रैंक हासिल हुई और वह IAS ऑफिसर बनने में कामयाब हुए।

महज 22 की उम्र में आईएएस बने प्रदीप कहते हैं, कि इस एग्जाम को पास करने में धैर्य और विश्वास अहम भूमिका निभाते हैं। यह एक लंबी प्रक्रिया है जो सालों चलती है पर इस दौरान हिम्मत न हारें। एक बात याद रखें कि सच्ची और कड़ी मेहनत का फल आज नहीं तो कल मिलता जरूर है।

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प्रदीप सिंह ने आज अपनी मेहनत और लगन के दम पर अपनी सफलता की कहानी लिखी है। उनकी यह कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है। कभी हार ना मानने का जज्बा और लगातार मेहनत करके आज वो एक मिसाल कायम कर चुके हैं।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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