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Monday, January 30, 2023

12 वर्ष में हुई पैरालिसिस की शिकार, डिप्रेसन में भी गईं, फिर भी जीता गोल्ड मेडल: अवनि लेखरा

क्या आप सोच सकते है कि किसी इंसान को महज 12 साल की उम्र में पैरालिसिस हो जाए और वो टोक्यो पैरालंपिक में गोल्ड जीत कर इतिहास रच दे। जी हाँ ऐसा हुआ है।

अवनि लेखरा ने पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। वो निशानेबाजी में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में।

एक दुर्घटना ने बदला जिंदगी

अवनि लेखरा जन्म 8 नवंबर 2001 को राजस्थान के जयपुर में एक सामान्य परिवार में हुआ। अवनि लेखरा की जिंदगी में पीड़ादायक पल तब आया जब वो 11 साल की थीं। साल 2012 में एक कार हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई थी और उनको पैरालिसिस हो गया था। इसके बाद वो हमेशा-हमेशा के लिए व्हीलचेयर पर आ गईं।

डिप्रेशन में चली गईं अवनी

इस हादसे ने अवनि को बुरी तरह तोड़ दिया। वो अक्सर चुप रहने लगीं किसी से बात नहीं करती थी। पूरी तरह डिप्रेशन में चली गईं और इतनी कमजोर हो गई थी कि कुछ कर नहीं पाती थी। अवनि ने अपने जीवन में निराशा की दीवारें बना ली थी। महज 12 साल की उम्र में पैरालिसिस का शिकार हुई अवनि को व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा।

अवनि के ज़िंदगी में अहम बदलाव

अपनी जिंदगी से निराश हो चुकी अवनि के जीवन में अहम बदलाव तब आया जब उनके माता-पिता ने अवनि को किसी खेल से जोड़ने और उनका डिप्रेशन दूर करने का विचार किया। उनके माता-पिता ने अवनि को शूटर अभिनव बिंद्रा की जीवनी भी पढ़ने के लिए दी और उसे पढ़ने के बाद अवनि के मन में ख्याल आया कि वह शूटिंग कर सकती है। शूटिंग में पहली बार तो अवनि के हाथों से गन तक नहीं उठी लेकिन उसके बाद अप्रैल 2015 से वह लगभग नियमित रूप से शूटिंग रेंज में जाने लगीं।

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कोच के सहयोग किया

अपने शूटिंग के सपने को पूरा करने के लिए अवनि ने कोच का सहारा लिया। उनके कोच ने उनका पूरा सहयोग किया। अपने दृढ़ संकल्प के साथ उसने खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक और 2015 में राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक जीता। जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अवनि लेखरा गोल्ड जीतने से पहले भी साल 2018 में हुए एशियाई खेलों के महिलाओं के लिए आर-2 एयर राइफल स्टैंडिंग 10 मीटर, R3 — मिक्स्ड 10M एयर राइफल प्रोन, R6 मिक्स्ड 50M राइफल प्रोन में भाग ले चुकी हैं।

क’रोना काल में भी मेहनत

क’रोना के चलते अवनि को पिछले दो सालों से काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस दौरान उनकी प्रेक्टिस पर भी काफी असर पड़ा। लेकिन उनके पिता ने घर में टारगेट सेट कर अवनि की प्रेक्टिस में कोई कसर नहीं छोड़ी। पैरालंपिक की तैयारी कर रही अवनि घर पर ही टारगेट पर प्रेक्टिस कर रही थीं और साथ ही उस समय उनका गोल्ड पर निशाना साधना ही लक्ष्य था। इसके लिए वो नियमित रूप से जिम और योगा पर ध्यान दे रही थीं।

गोल्ड जीतकर रच दिया इतिहास

अपने संघर्षों को अपनी सफलता में बदलते हुए साल 2021 में आयोजित हुए टोक्यो पैरालंपिक में भारतीय शूटर महिला खिलाड़ी लेखरा ने गोल्ड मेडल जीतकर एक नया इतिहास रच दिया। मात्र 19 वर्ष की उम्र में अवनि लेखरा ने महिलाओं के लिए एयर राइफल के 10 मीटर के क्लास SH1 में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। अवनि लेखरा टोक्यो पैरालंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बन गईं।

आज अवनि लेखरा ने यह सिद्ध कर दिया है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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