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Wednesday, May 31, 2023

दीवारों को बनाया ब्लैकबोर्ड और गलियों को क्लासरूम, गरीबों को दे रहे हैं मुफ्त शिक्षा: शानदार पहल

क’रोना म’हामारी ने सभी को परेशान किया। इससे लोग मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से कमजोर हुए। जिनके पास सुविधाएं थी उनके बच्चों को पढ़ाई में दिक्कत नही हुई पर जिन गरीब लोगों के पास साधन का आभाव था उनके बच्चे वंचित रह गए।

पर आज हम आपको बंगाल के रहने वाले श्री दीप नारायण नायक के बारे में बताएंगे जिन्होंने बंगाल के गरीब बच्चों को क’रोना काल में शिक्षित करने के लिए निःस्वार्थ भाव से उन्हें शिक्षा प्रदान की। आइये जानते है उनके इस सेवा भाव को।

सड़क को विद्यालय बनाया

पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के रहने वाले 34 वर्षीय श्री दीप नारायण नायक पेशे से शिक्षक हैं। क’रोना म’हामारी के कारण पिछले 1 साल से देश के सभी स्कूल बंद हैं। जिसके कारण बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिल पा रही थी। ऐसे समय में दीप नारायण नायक ने बिना किसी सुविधा के जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित करने की पहल की। वो बीते एक साल से तमाम घरों की दीवारों पर ब्लैकबोर्ड पेंट कर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वो सड़कों पर ही क्लास का संचालन करते हैं और दीवारों को ब्लैकबोर्ड बना कर लिखने का काम करते हैं।

नैतिक मूल्यों को भी समझाते हैं दीप

दीप बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देते। बल्कि वो इन बच्चों को नर्सरी कविताओं से लेकर मास्क पहनने और हाथ धोने के महत्व को भी सिखाते हैं। वो बच्चों को व्यवहारिक शिक्षा की भी जानकारी देते हैं ताकि बच्चे अपने माता-पिता को भी जागरूक कर सकें।

वंचित छात्रों की जिम्मेदारी ली

क’रोना और लॉ’कडाउन के कारण कई बच्चे शिक्षा से वंचित हो गए थे। दीप नारायण ने सड़कों पर बच्चों को घूमता देख बहुत चिंतित होते थे। उन्होंने देखा कि सड़कों पर घूमने वाले अधिकतर बच्चे अपने परिवार में दैनिक वेतन वाले मजदूरों के हैं जो अभावों के कारण शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते। उन्हें देख श्री दीप नारायण नायक ने सोचा कि ऐसे में अगर किसी भी कारणवश इन बच्चों की शिक्षा रुक जाती है तो वो शिक्षा से पूरी तरह दूर हो जाएंगे और ऐसे में इसका नुकसान समाज को भी उठाना होगा। इसलिए उन्होंने बच्चों को शिक्षित करने की ठानी।

वैक्सीन के लिए जागरूक किया

दीप नारायण ने आदिवासी समाज के लोगों को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं। क’रोना सं’क्रमण की तीसरी लहर से लोगों को बचाने के लिए श्री दीप नारायण ने टीका लगवाया था। आदिवासी समुदाय के लोग इससे परिचित नहीं थे इसलिए दीप नारायण ने स्वंय लोगों को वैक्सीन कैंप तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उठायी और सभी का टीकाकरण कराया।

यह भी पढ़ें: UP के इस स्कूल में जाति के हिसाब अलग अलग हैं बर्तन, किया जाता है ऊँची जातियों एवं दलितों में भेदभाव

‘सड़क वाले शिक्षक’ के नाम से प्रसिद्ध

बच्चों को शिक्षित करने और आदिवासी समुदायों के लोगों को वैक्सीन के प्रति जागरूक करने के कारण दीप नारायण नायक के कार्यों की हर कोई सराहना कर रहा है। यही नहीं आदिवासी समुदाय के लोग और बच्चे उन्हें सड़क वाले शिक्षक के नाम से संबोधित करते हैं। सड़कों पर घूमने वाले बच्चें आज शिक्षा के प्रति जागरूक हो रहे हैं।

आज दीप नारायण नायक अपने नाम के अनुरूप लोगों के लिए नायक हैं। उनके इस सेवा की भावना की जितनी भी तारीफ की जाए कम है।

Shubham Jha
Shubham Jha
शुभम झा (Shubham Jha)एक पत्रकार (Journalist) हैं। भारत में पत्रकारिता के क्षेत्र में बदलाव लाने की ख्वाहिश रखते हैं। वह चाहते हैं कि पत्रकारिता स्वच्छ और निष्पक्ष रूप से किया जाए। शुभम ने पटना विश्वविद्यालय (Patna University) से पढ़ाई की है। वह अपने लेखनी के माध्यम से भी लोगों को जागरूक करते हैं।

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