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Wednesday, February 8, 2023

हिन्दू धर्म में अंतिम संस्कार के दौरान शव के सिर पर क्यों मारा जाता है डंडा, क्या है कपाल क्रिया

जो इंसान इस पृथ्वी पर आया है वह एक न एक दिन जरूर जाएगा। यह जीवन का सबसे कड़वा सच है। एक दिन हर किसी की मौ’त होनी है। यही विधि का विधान है कि मौ’त से न तो कोई बच पाया है और न ही बच सकता है। जीवन में लोग धन कमाने के लिए बहुत कुछ करते है लेकिन हर किसी को एक न एक दिन सब कुछ छोड़कर मौ’त के गले लगना है।

लोग दिन रात पैसों के पीछे भागते रहते है। मनुष्य खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही जाता है। म’र के भी लोग अपने साथ कुछ नही ले जाते है। म’रने के बाद मृ’तक के परिजनों को अपने तरह-तरह के क्रियाकलाप करते हुए देखा होगा। उसी क्रिया में एक आता है कपाल क्रिया जिसमें मृ’तक के सर पर डंडा से मारा जाता है। ऐसा क्यों किया जाता है आइये जानते हैं।

मृ’तक के लिए कपाल क्रिया है जरूरी

जब किसी के घर में कोई म’र जाता है तो पूरा घर शोकाकुल हो जाता है। मृ’तक के परिजन चाहते है कि मृ’तक को मोक्ष प्रदान हो। म’रने के बाद मृ’तक को कोई परेशानी न हो। उसकी आत्मा को शांति प्रदान हो। इसके लिए परिजन तरह-तरह के क्रिया करते है। इन्ही क्रिया में कपाल क्रिया भी आता है। कपाल क्रिया के दौरान मृ’तक के मष्तक पर डंडे से प्रहार किया जाता है। यह प्रहार इसलिए किया जाता है की मृ’तक का सर जल्दी जल जाए। सर ही एक ऐसा अंग होता है जिसे जलने में समय लगता है इसलिए यह क्रिया जरूरी होती है।

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मृ’तक को अगले जन्म में होती है परेशानी

यदि दाह संस्कार के समय मृ’तक के सिर की हड्डी पूरी तरह से नही जलती, तो मृ’तक को अगले जन्म में समस्याएं होती है। जैसे उसका विकास पूर्ण रूप से नही हो पाता है। और यह भी माना गया है यदि कपाल क्रिया नही की जाए तो मृ’तक के पूरी तरह से प्राण निकल नही पाते हैं। जिससे उसको नया जन्म लेते समय बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कपाल क्रिया के दौरान मस्तक को अच्छे से जलाना आवश्यक होता है। कपाल क्रिया में जलते हुए शव के सिर पर तीन बार डंडा भी मारा जाता है।

हिन्दू धर्म में कई तरह के क्रिया

हिन्दू धर्म में मृ’तक को मोक्ष प्रदान करने के लिए कई तरह के क्रियाएं की जाती हैं। मृ’तक के आत्मा के शांति के लिए श्राद्धकर्म भी कराया जाता है। परिजन चाहते है कि मृ’तक जहाँ भी हो उसे कोई परेशानी न हो। मृ’तक के अगले जन्म के लिए ऐसा किया जाता है। हर धर्म में अंतिम संस्कार अलग-अलग ढंग से किया जाता है। हिंदुओं में श’व को जलाया जाता है तो मुसलमान लोग श’व को दफनाते हैं। हर जगह अलग-अलग ढंग से श’व के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया होती है।

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पूर्व जन्म में किए गए कर्म महत्वपूर्ण

मनुष्य को अपने पूर्वजन्म के शुभ कर्मों के परिणामस्वरूप ही परमात्मा से यह शरीर मिलता है। सब प्राणियों से मनुष्य का शरीर श्रेष्ठ होने पर भी यह प्रायः सारा जीवन दुःख व परेशानियों से घिरा रहता है। मनुष्य को यह पता नहीं होता कि यह सारी वस्तुयें जिन्हें हम अपने सुख के लिये प्राप्त करते हैं, उनमें दुःख भी मिला रहता है। इसलिए हमें मोक्ष की प्राप्ति के लिए अच्छे कर्म करना चाहिए। अच्छे कर्म के अनुसार ही अगले जन्म का मार्ग खुलता है।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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