कभी खाते थे लोकल ट्रेन के धक्के, आज छुड़ा रहे हैं इंग्लैंड के छक्के: शार्दूल ठाकुर

कठोर परिश्रम ही मनुष्य का असली धन होता है और जो भी मेहनत करते हैं वो सफल अवश्य होते हैं।

बिना परिश्रम के सफलता अर्जित कर पाना असंभव है। इस दुनिया में जो व्यक्ति परिश्रम करता है सफलता उसी के कदम चूमती है। आज हम आपको एक ऐसे ही इंसान के बारे में बताएंगे जिन्होंने अपनी मंजिल को हासिल करने के लिए खूब मेहनत की और आज वो अपने देश का नाम रौशन कर रहे हैं। आइये जानते है उनके बारे में।

शार्दुल ठाकुर का परिचय

आज शार्दूल ठाकुर को कौन नही जानता। उनके टीम इंडिया में ऑलराउंडर की भूमिका की तारीफ सभी जगह होती है। पर उनका जीवन बहुत संघर्षों से बीता। शार्दुल ठाकुर का जन्म 16 अक्टूबर 1991 को पालघर, महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई भी वही से पूरी की। इन्होंने अपने करियर में रणजी ट्रॉफी, आईपीएल क्रिकेट मैच और इसके साथ अंतरराष्ट्रीय मैच की शुरुआत टेस्ट क्रिकेट मैच से शुरू किया था।

पिता करते है नारियल का व्यवसाय

शार्दुल ठाकुर के पापा का नाम नरेन्द्र ठाकुर है जो नारियल का व्यवसाय करते हैं। शार्दुल बचपन से ही क्रिकेट के बहुत ज़बरदस्त फैन और शौकीन थे। शार्दुल बचपन से ही अपने खेल में माहिर रहे है एक बार उन्होंने स्कूल में क्रिकेट खेलते वक्त 6 गेंदों पर 6 छक्के लगाये थे। शार्दुल ठाकुर ने अपने प्रथम श्रेणी के करियर की शुरुआत एक मध्यम गति के तेज गेंदबाज़ के तौर पर की थी। इन्होने अपना पहला प्रथम श्रेणी का मैच नवम्बर 2012 को राजस्थान के खिलाफ खेला था।

ट्रेन से करते थे रोजाना सफर

उनके घर पालघर में बेहतर सुविधाएं ना होने के कारण उनका परिवार बोइसर शिफ्ट हो गया था। मुंबई के लिए खेलने से पहले उन्होंने बहुत संघर्ष किया था। जब उन्हें रणजी टीम में मौका मिला तो वह रोजाना मुंबई जाने के लिए ट्रेन से सफर करते थे। शार्दुल ठाकुर को 2 साल पहले अपने पैर की सर्जरी भी करानी पड़ी थी। वह तब आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेले थे और बाद में चोट के कारण उन्हें काफी परेशानी भी झेलनी पड़ी। शार्दुल ने शानदार वापसी करते हुए चेन्नई की टीम में अपनी जगह पक्की की थी।

यह भी पढ़ें: पिछले 7 साल में छः ICC टूर्नामेंट्स हारा है भारत, जानिए क्या विराट भारत को RCB बना देंगे?

सचिन ने कहा था कि वजन घटाओ

अपने ज़िंदगी के शुरुआती दिनों में उन्होंने काफी मेहनत की। शार्दुल हर दिन पालघर स्टेशन से 3.30 बजे सुबह जो ट्रेन खुलती थी उसके पकड़ा करते थे। 13 साल की उम्र में करीब 90 किलोमीटर के थकाऊ सफर के बाद वह मुंबई के चर्चगेट स्टेशन पर उतरते। उनका एकमात्र मकसद था क्रिकेट खेलना। जल्द ही वो मुंबई के घरेलु लेवल क्रिकेट में सबसे अच्छे तेज गेंदबाज़ माने जाने लगे। लोग उन्हें जब ट्रेन में देखते थे तो उनकी खूब तारीफ करते थे।

टेस्ट टीम में अपनी जगह पक्की की

शार्दुल ने 2017 में श्रीलंका के खिलाफ वनडे से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत की। उन्हें टेस्ट क्रिकेट में 2018 में खेलने का मौका मिला, लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ हैदराबाद में वह कोई विकेट नहीं ले पाए थे। उन्होंने अभी तक 4 टेस्ट मैच खेले हैं और कुल 14 विकेट लिए हैं। इसके अलावा वनडे में उन्होंने 15 मैचों में 22 विकेट और टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर में 22 मैचों में 31 विकेट झटके हैं। उन्होंने टेस्ट में 3 अर्धशतक भी जमाए हैं। इस तरह भारतीय टेस्ट टीम में उनका बेहतरीन प्रदर्शन है। टेस्ट मैच में वो ऑलराउंडर की भूमिका निभाते हुए नजर आते हैं। वो बॉल के साथ बल्ले से भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं।

क्रिकेट खेलने वाले युवाओं के लिए आज शार्दुल ठाकुर किसी प्रेरणा से कम नही हैं।

शेयर जरूर करें:-

By Shubham Jha

Shubham वर्तमान में पटना विश्वविद्यालय (Patna University) में स्नात्तकोत्तर के छात्र हैं। पढ़ाई के साथ-साथ शुभम अपनी लेखनी के माध्यम से दुनिया में बदलाव लाने की ख्वाहिश रखते हैं। इसके अलावे शुभम कॉलेज के गैर-शैक्षणिक क्रियाकलापों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।