13.1 C
New Delhi
Monday, January 30, 2023

‘केसर’ जितना महंगा उतनी ही जालसाजी: जानिए कश्मीर में उगने वाले सबसे बेहतरीन केसर की पहचान क्या है

जम्मू-कश्मीर केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए नहीं जाना जाता है बल्कि बागवानी और कृषि क्षेत्र के तमाम उत्पादों की गुणवत्ता और स्वाद के लिए भी पहचाना जाता है। ऐसा ही उत्पाद है केसर। कश्मीर में बड़ी मात्रा में केसर उगाया जाता है। कश्मीरी केसर को दुनिया में सबसे अच्छा केसर माना जाता है। दुनिया में केसर की कीमत इसकी क्वालिटी पर लगाया जाता है। दुनिया के बाजारों में कश्मीरी केसर की कीमत 3 लाख से 5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक है। केसर के पौधों में अक्टूबर के पहले सप्ताह में फूल लगाने शुरू हो जाते हैं और नवंबर में यह तैयार हो जाता है।

इंटरनेशनल मार्किट में केसर को GI का टैग।

जम्मू और कश्मीर सरकार के कृषि निदेशालय द्वारा कश्मीरी केसर को GI टैग प्रदान करने के लिये आवेदन दायर किया गया था और यह सफल भी हुआ। केसर जो दुनिया का सबसे महंगा मसाला है। इसी वजह से इंटरनेशनल मार्किट में केसर को GI का टैग दिया गया है। GI टैग मिलने के बाद केसर को अपने प्रतिद्वंदीयो से प्रतियोगिता में मदद मिलेगी।

बहुत दिनों पहले से हो रही है केसर की खेती।

औषधीय गुणों से भरपूर केसर की कीमत बाजार में 300-350 रुपए प्रति ग्राम रहती है। इत्र और पान मसाला इंडस्ट्री में केसर की खासी मांग है। कश्मीर में केसर पुलवामा ज़िले के पंपोर और इसके आसपास के गांवों में बरसों से उगाया जाता है।साथ में श्रीनगर के बडगाम और पम्पपोर के केरवा में भी उपजता है।केसर की खेती में 226 गांव के 16 हज़ार से भी अधिक लोग लगे हुए है।यह केसर की खेती पहली सदी BCE से मानी जाती हैं। मध्य एशिया लोगो ने सबको केसर की खेती से परिचित करवाया था।

कश्मीरी केसर का है अलग महत्व।

कश्मीरी केसर लाल रंग का होता है। यह केसर सूक्ष्म तन्तुओं से युक्त होता है। यह कमल जैसे गन्ध वाला होता है। केसर की तीनों श्रेणियों में यह उत्तम श्रेणी का माना जाता है। आपने कई बार यह देखा होगा कि जब कोई महिला गर्भवती होती है, तो उसे केसर वाला दूध पीने को दिया जाता है। इसी तरह रोग जैसे कमजोरी, सर्दी-जुकाम होने पर, या अन्य बीमारियों में केसर के सेवन करने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि केसर स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।

केसर की खेती में आई है गिरावट।

केसर की खेती मे मेहनत बहुत ज्यादा लगती है। जमीन ठीक करना, बीज बोना और सिंचाई तक यह सामान्य खेती की तरह होती है, लेकिन असली मेहनत फसल तैयार होने के बाद शुरू होती है। केवल 1 किलोग्राम केसर तैयार करने के लिए किसानों को 1.5 लाख केसर के फूल चुनने पड़ते हैं। फिर हर फूल से स्टिग्मा निकालकर उन्हें सुखाना पड़ता है। इतनी मेहनत के बाद भी उपज का कम मूल्य मिलने के चलते कश्मीरी केसर की खेती से मुंह मोड़ने लगे है।और इसके पैदावार में गिरावट आई है।युवाओं की भागीदारी न होना भी एक महत्वपूर्ण कारण है।

जलवायु परिवर्तन भी कारण।

जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ती जा रही है। अब इसके असर भी दिखने शुरू हो गए हैं।इसके चलते कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कृषि क्षेत्र भी इसके प्रभाव से अछूता नहीं है। इससे खेती में पैदावार कम हो रही है और साथ ही उपज की गुणवत्ता पर भी विपरीत असर हो रहा है। जलवायु परिवर्तन के चलते भारत में केसर की खेती पर बुरा असर देखा जा रहा है।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

Related Articles

Stay Connected

95,301FansLike
- Advertisement -