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Monday, January 30, 2023

ज्ञान की बात: जानिए आखिर किस शख्स की याद में मनाया जाता है ‘डॉक्टर्स डे’

हमारे जीवन में डॉक्टर का कितना महत्व है, यह हम सब जानते हैं। भारत में तो पहले से ही डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया गया है। लेकिन आज पूरी दुनिया में डॉक्टर्स के काम की सराहना की जा रही है। डॉक्टरों के समर्पण और ईमानदारी के प्रति सम्मान जाहिर करने के लिए हर साल 1 जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस मनाया जाता है। डॉक्टर्स डे की शुरूआत करने का मुख्य कारण पश्चिम बंगाल के आर्किटेक्ट कहे जाने वाले, स्वतंत्रता सेनानी, भारत रत्न से सम्मानित डॉ. बिधानचंद्र रॉय हैं। हर साल देश के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर इसे मनाया जाता है। डॉ. बिधान चंद्र रॉय का संपूर्ण जीवन समाज की सेवा करने में गुजरा था। आइए जानते हैं डॉ. बिधान चंद्र रॉय के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें।

बिहार में पले बढ़े थे डॉ बिधान चंद्र रॉय

1 जुलाई 1882 को बिहार के पटना में एक प्रवासी बंगाली परिवार में जन्में डॉ बिधान चंद्र रॉय बचपन से ही मेधावी छात्र रहे थे। यही कारण हैं कि उन्होंने अन्य छात्रों के मुकाबले अपनी शिक्षा जल्दी पूरी कर ली। बिधान चंद्र राय अपने पांचों भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। पटना विश्वविद्यालय से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनकी मेडिकल पढ़ाई कोलकाता में पूरी हुई। जिसके बाद उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा इंग्लैंड से पूरी की। 1911 में उन्होंने भारत में चिकित्सकीय जीवन की शुरुआत की। इसके बाद वह कोलकाता मेडिकल कॉलेज में व्याख्याता बन गए। वहां से वह कैंपबैल मेडिकल स्कूल और फिर कारमिकेल मेडिकल कॉलेज गए। इसके बाद वह राजनीति में आ गए।

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कठिनाइयों के बावजूद भी पूरी की पढ़ाई

मेडिकल कॉलेज में डॉ बिधान चंद्र रॉय ने बहुत कठिन समय गुजारा। जब वह प्रथम वर्ष में थे तभी उनके पिता डिप्टी कलेक्टर के पद से सेवा-निवृत्त हो गए। और उनको पैसे भेजने में असमर्थ हो गए। ऐसे कठिन वक़्त में उन्होंने छात्रवृत्ति से अपना गुजारा किया। चूँकि उनके पास किताबें खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। इसलिए वह दूसरों से नोट्स और कॉलेज के पुस्ताकालय से किताबें लेकर अपनी पढ़ाई पूरी करते थे। मेडिकल की पढ़ाई के बाद बिधान चंद्र रॉय राज्य स्वास्थ्य सेवा में नियुक्त हो गए। यहाँ उन्होंने समर्पण और मेहनत से कार्य किया। अपने पेशे से सम्बंधित किसी भी कार्य को वह छोटा नहीं समझते थे।

स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भारत को आजादी दिलाने का किया कार्य

डॉ बिधान चंद्र रॉय सिर्फ एक शिक्षक और एक चिकित्सक के रूप में नहीं बल्कि स्वतंत्रता सेनानी के रूप में महात्मा गांधी के साथ असहयोग आंदोलन में शामिल होने के कारण भी काफी प्रसिद्धि पाई थी। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने और बाद में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पद भी संभाला। असहयोग आंदोलन आदि में बिधान चंद्र रॉय ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शुरुआत में उन्हें लोग महात्मा गांधी, नेहरू के डॉक्टर के रूप में जानते थे। महात्मा गांधी के कहने पर उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

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कहे जाते हैं बंगाल के निर्माता

डॉ॰ बिधान चंद्र रॉय एक प्रसिद्ध चिकित्सक, शिक्षाशास्त्री, स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। देश की आजादी के बाद सन 1948 से लेकर सन 1962 तक वह पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री रहे। पश्चिम बंगाल के विकास के लिए किये गए कार्यों के आधार पर उन्हें ‘बंगाल का निर्माता’ माना जाता है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में पांच नए शहरों की स्थापना की दुर्गापुर, कल्याणी, बिधाननगर, अशोकनगर और हाब्रा। उनका नाम उन चंद लोगों में शुमार है जिन्होंने एम.आर.सी.पी. और एफ.आर.सी.एस. को साथ-साथ और दो साल और 3 महीने में पूरा किया।

समाज सेवा करना ही था मुख्य उद्देश्य

डॉ. बिधान चंद्र रॉय जब तक जीवित रहे तब तक उन्होंने लोगों का मुफ्त में इलाज किया। वह जब डॉक्टर थे तब भी और जब चीफ मिनिस्टर बने, तब भी उनका उद्देश्य मानव सेवा और जन कल्याण ही था। वह महिलाओं के उत्थान के लिए भी कार्य किया करते थे। बिधान चंद्र रॉय के जन्मदिन के दिन डॉक्टर डे मनाने का सबसे बड़ा कारण था कि वह जो भी आय अर्जित करते थे, सब कुछ दान कर देते थे। रॉय एक रोल मॉडल थे। आजादी के आंदोलन के समय उन्होंने घायलों और पीड़ितों की निस्वार्थ भाव से सेवा की थी।

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ऐसे हुई डॉक्टर्स डे की शुरूआत

डॉ. बिधान चंद्र रॉय के महान कार्य को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से भी 1961 में सम्मानित किया था। 80 वर्ष की आयु में 1962 में अपने जन्मदिन के दिन यानी 1 जुलाई को ही उनकी मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद महान चिकित्सक व स्वतंत्रता सेनानी डॉ.बिधान चंद्र रॉय के सम्मान में भारत में डॉक्टर्स डे की शुरूआत 1991 में तत्कालिक सरकार द्वारा की गई थी। तब से हर साल 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। भारत के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री को सम्मान और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है।

डॉक्टर जिंदगी और मौ’त के बीच जूझ रहे मरीजों का न सिर्फ इलाज करते हैं, बल्कि उन्हें एक नया जीवन भी देते हैं। इसलिए उन्हें धरती पर भगवान का दर्जा दिया जाता है। डॉ.बिधान चंद्र रॉय आज भले ही हमारे बीच नहीं है। लेकिन उनके द्वारा किए गए कार्य हमेशा हमारे ज़हन में जीवित रहेंगे।

Sunidhi Kashyap
Sunidhi Kashyap
सुनिधि वर्तमान में St Xavier's College से बीसीए कर रहीं हैं। पढ़ाई के साथ-साथ सुनिधि अपने खूबसूरत कलम से दुनिया में बदलाव लाने की हसरत भी रखती हैं।

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