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Wednesday, February 8, 2023

इस तस्वीर से लगी पाकिस्तान को मिर्ची, जिन्हें 50 साल से खोज रहा है पाक, उन्हें मिला पद्मश्री सम्मान

भारत सरकार हर साल देश के कई हीरों को पदम पुरस्कारों से सम्मानित करती हैं। इस वर्ष भी कई समाज सुधारकों और वीरों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। लेकिन इस वर्ष एक ऐसे व्यक्ति को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया जिसका नाम सुनकर पड़ोसी देश भी हैरान रह गए थे।

यह नाम था पाकिस्तानी सेना में कर्नल रहे काजी सज्जाद अली जहीर, कर्नल जहीर ने पाकिस्तानी सेना के कई खुफिया दस्तावेजों को भारत को सौंपा था। इतना ही नहीं उन्होंने बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी के हजारों लड़कों को सैन्य ट्रेनिंग भी दी थी। आइए जानते हैं उनके बारे में।

पाकिस्तान की सेना में भर्ती

पूर्वी पाकिस्तान जो कि अब बांग्लादेश में है वहां जन्में काजी सज्जाद का पूरा नाम काजी सज्जाद अली जहीर है। लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद एक सैन्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता ब्रिटिश आर्मी में तैनात थे। उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध में म्यांमार में लड़ाई लड़ी थी। 1971 के भारत-पाक युद्ध से कुछ ही समय पहले काजी सज्जाद अली जहीर पाकिस्तानी फौज में भर्ती हुए थे। उस वक्त पूर्वी पाकिस्तान में सेना की क्रूरता को देखकर उनका दिल दहल गया। वह उस वक्त पाकिस्तान के सियालकोट सेक्टर में तैनात थे। पाकिस्तानी फौज की क्रूरता से वह इस हद तक परेशान हुए कि उन्होंने एक दिन सेना के अहम दस्तावेज और मैप अपने जूते में छिपाकर भारत भाग आए।

घर में लगा दी आग

काजी सज्जाद अली जहीर के भारत आने के बाद बांग्लादेश में उनके घर को पाकिस्तानी सेना ने आग लगा दी थी। उनकी मां और बहन को भी पाकिस्तानी सेना ने प्रताड़ित किया था, लेकिन वो दोनों भागकर सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच गईं थी। कर्नल जहीर 1969 के आखिर में पाकिस्तानी सेना में शामिल हुए थे। यही नहीं उनके जाने के बाद पाकिस्तानी सेना ने उनके नाम से डेथ वारेंट में जारी कर दिया था।

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20 रूपये लेकर आए थे भारत

जब वह भारत आए थे तो उनकी जेब में केवल 20 रूपये ही थे। सेना ने जब उनकी तलाशी ली तो उनके पास कुछ अहम दस्तावेज बरामद हुए। पहले तो भारतीय सेना ने उनको पाकिस्तान का जासूस समझा, लेकिन उनको पठानकोट ले जाया गया जहां वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उन्होंने पाकिस्तानी सेना की योजना के बारे में जो बातें बताई उस पर सेना ने कार्रवाई की और वो जानकारी सटीक निकली। वह बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में भी शामिल हुए।

बांग्लादेश को आजाद के लिए ट्रेनिंग

लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद को दिल्ली में कई महीनों तक एक सुरक्षित घर में रखा गया। इसके बाद बांग्लादेश को आजाद कराने के लिए मुक्ति वाहिनी को छापामार युद्ध की ट्रेनिंग देने के बाद उनको बांग्लादेश भेजा गया। जहीर ने हजारों बांग्लादेशी नागरिकों को सैन्य प्रशिक्षण दिया। उनके ही देखरेख में सिलहट के पास भारतीय सेना के सौंपे हुए तोप से एक मोर्चा भी सेट किया गया था। इन्हीं तोपों की गोलीबारी के कारण मुक्ति वाहिनी ने सिलहट के आसपास के इलाकों में पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया था।

सम्मानित हुए काजी सज्जाद

भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद को 1971 के जंग में मुहैया करवाई गई अहम जानकारी को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है। यही नहीं लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद को बांग्लादेश में वीर प्रोतिक और बांग्लादेश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान स्वाधीनता पदक से सम्मानित किया जा चुका है।

Shubham Jha
Shubham Jha
शुभम झा (Shubham Jha)एक पत्रकार (Journalist) हैं। भारत में पत्रकारिता के क्षेत्र में बदलाव लाने की ख्वाहिश रखते हैं। वह चाहते हैं कि पत्रकारिता स्वच्छ और निष्पक्ष रूप से किया जाए। शुभम ने पटना विश्वविद्यालय (Patna University) से पढ़ाई की है। वह अपने लेखनी के माध्यम से भी लोगों को जागरूक करते हैं।

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