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Monday, January 30, 2023

सिर्फ दो वर्ष की उम्र में गवा दी थी आंखों की रौशनी, दिव्यांगता को दी मात और बन गए IAS अफसर

जीवन में सफल सभी बनना चाहते है। मगर कुछ लोग कठिनाइयों की वजह से जल्दी हार मान जाते है। मगर कुछ लोग अपने जीवन के किसी भी परेशानी से घबराते नही है। अपने लक्ष्य पर निरंतर निशाना साधे रहते है। और अंत में अपने उस लक्ष्य को पूरा करते है। आज हम आपको एक ऐसे इंसान के बारे में बताएंगे जिनकी आंखों की रौशनी महज दो वर्ष की उम्र में चली गई। पर उन्होंने अपनी अपंगता को मात देकर पहले प्रयास में ही आईएएस अफसर बन गए।

राकेश शर्मा का परिचय

राकेश मूल रूप से हरियाणा के छोटे से गांव सांवड़ के रहने वाले है। वह लगभग 13 साल नोएडा के सेक्टर 23 में भी रहे है। राकेश शर्मा का बचपन बेहद मुश्किलों में गुजरा है। वह एक सामान्य इंसान की जिंदगी जीने को भी तरसते रहे है। दृष्टिहीन होने का दुख और परिवार में गरीबी उनके लिए मुश्किलें लाती रही।

बचपन में ही चली गई आंखों की रौशनी।

बचपन में ही राकेश शर्मा की आंखों की रौशनी चली गई थी। वह जब दो साल के थे जब दवाई के रिएक्शन होने की वजह से उन्हें दिखना बंद हो गया। काफी इलाज के बावजूद भी कोई फायदा नहीं हुआ। राकेश का विजन पूरी तरह चला गया। और वह बिलकुल भी देख नहीं सकते। पर उन्होंने हमेशा अपनी पढ़ाई जारी रखी। बहुत कोशिशों के बावजूद उन्हें सामान्य बच्चों के स्कूल में एडमिशन नहीं मिला। मजबूरन उन्हें स्पेशल स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ी। उन्होंने अपनी पढ़ाई ब्रेल लिपी (दृष्टिहीन बच्चों के लिए शिक्षा पद्धति) से पूरी की।

माँ-बाप ने हौसला नही हारा

राकेश के माता-पिता ने कभी अपने हौसले को कम नही किया। उन्होंने राकेश की पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया। उनके आस-पड़ोस के लोग ,उनके रिश्तेदार कहते थे कि राकेश को अनाथ आश्रम छोड़ आओ ,पर उन्होंने राकेश के सपनों को पूरा करने में अपना पूरा योगदान दिया ।

उच्च शिक्षा के साथ बदल गई ज़िंदगी ।

राकेश ने सोशल वर्क से अपना स्नातक किया। राकेश ने सरकारी नौकरी के बारे में खूब सुना था। फिर ये भी सुना कि देश में बड़े-बड़े अधिकारी भी होते हैं। तो उन्होंने भी अधिकारी बनने का सपना देखा। समाज के उत्थान के उद्देश्य से उन्होंने UPSC में जाने का मन बनाया।

पहले प्रयास में सफलता हासिल की।

बेहतर योजना और कार्यशैली के साथ उन्होंने इसकी तैयारी करनी शुरू की। वो ऑडियो सुनकर नोट्स बनाते थे। हजार मुश्किलों के बावजूद उन्होंने पहले ही प्रयास में ही साल 2018 में यूपीएससी परीक्षा को पास किया। सिविल सर्विस की परीक्षा में उन्हें 608 रैंक हासिल हुआ। IAS अफसर बन राकेश दृष्टिहीन लोगों के लिए बेहतर समाज बनाना चाहते हैं।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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