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Monday, January 30, 2023

नारी शक्ति: फौजी माता-पिता की बेटी कड़ी मेहनत से बनीं IAS

माता-पिता का महत्व बच्चों के जीवन में सर्वोपरि है। अभिभावक ही अपने बच्चों के प्रथम गुरु होते हैं। वही बच्चे के भविष्य के बारे में सर्वप्रथम निर्णय लेकर उसकी परवरिश करते हैं। इसमें उनका सिर्फ इतना ही अभिमान होता है कि बच्चा जीवन में जो भी करे, वह अच्छा हो। संतान को नौ महीने गर्भ में धारण करने एवं विविध कष्ट सह कर भी उसका पोषण करने के कारण माता का स्थान विश्व में सबसे ऊंचा है। कड़ी मेहनत से धनोपार्जन कर संतान को अच्छी परवरिश देने के कारण पिता का स्थान भी श्रेष्ठ है।आज हम आपको एक ऐसे परिवार के बारे में बताएंगे जिस घर के पति-पत्नी आर्मी में होते हुए भी अपने बेटी को ऐसी परवरिश प्रदान की और बेटी बेटी भी UPSC निकाल बनी आईएएस।

कौन है वह बेटी ?

उस बेटी का नाम चंद्रज्योति सिंह है। चंद्रज्योति ने अपने उम्र के 22 साल में अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में 28वीं रैंक के साथ टॉप किया। साल 2019 के एग्जाम में उन्होंने यह सफलता पाई ।चंद्रज्योति के माता और पिता दोनों आर्मी में थे इसलिए उनका जीवन अलग-अलग शहरों में बीता।

बेहतर शिक्षा मिला।

चंद्रज्योति ग्रेजुएशन के लिए दिल्ली गईं और वहां के सेंट स्टीफंस कॉलेज से उन्होंने हिस्ट्री में बीए ऑनर्स किया।चंद्रज्योति हमेशा से अपने लक्ष्य को लेकर जागरूक थी ,और सिविल सर्विस के क्षेत्र में ही जाना चाहती थी। जिस समय उनका ग्रेजुएशन पूरा हुआ उनकी उम्र 20 साल थी। इसलिए उन्होंने एक साल ड्रॉप करके परीक्षा की तैयारी की और एक साल की तैयारी में ही न केवल चयनित हुईं बल्कि टॉपर भी बनीं।

अपनी तैयारी योजना बनाकर किया।

उन्होंने योजना बनाकर पढ़ाई किया। उन्होंने दिन को दो भागों में बांट लिया था। फर्स्ट हाफ में वे जीएस की तैयारी करती थी और सेकेंड हाफ में ऑप्शनल की। चूंकि हिस्ट्री उनका विषय था इसलिए ऑप्शनल के तौर पर इसे चुनने से उन्हें काफी मदद मिली। शुरू में वे दिन में 6 से 8 घंटे पढ़ती थी और परीक्षा पास आ जाने पर ये घंटे बढ़कर 10 तक पहुंच जाते थे। चंद्रज्योति ने पहले सिलेबस खत्म किया उसके बाद टेस्ट सीरीज ज्वॉइन की और खूब मॉक टेस्ट दिए।वे कहती हैं दिन के पहले और दूसरे हाफ की पढ़ाई खत्म करने के बाद रात में न्यूज पेपर पढ़ती थी और ऑनलाइन करेंट अफेयर्स की तैयारी करती थी। वे कहती हैं शुरू में उन्हें पेपर पढ़ने में काफी समय लगता था फिर धीरे-धीरे उन्होंने अपनी स्पीड बढ़ाई और एक से डेढ़ घंटे में पेपर खत्म करने लगी। इसी समय में करेंट अफेयर्स के लिए वे ऑनलाइन साइट्स की मदद लेती थी।

अन्य छात्र-छात्राओ को चंद्रज्योति की सलाह।

चंद्रज्योति दूसरे छात्रों को यह सलाह देती है की लिखावट बहुत जरूरी है।जैसे ही सिलेबस पूरा हो जाए लिख-लिखकर अभ्यास करें। वे नोट्स बनाने की सलाह भी देती हैं।वो कहती है कि रिवीजन पर खास ध्यान दें क्योंकि अगर पढ़ा हुआ भूल जाएंगे तो ऐसी पढ़ाई का कोई फायदा नहीं।

चंद्रज्योति से हमें यह सिख मिलती है कि योजनाबद्ध तरीका अपनाकर हम किसी भी परीक्षा में अव्वल हो सकते है। आज चंद्रज्योति अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा है।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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