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Sunday, January 29, 2023

गरीबी में माँ को बेचनी पड़ी थी देसी शराब, इन्हें भी लाना पड़ता था चखना, फिर भी बने कलक्टर

कहावत है कि किसी व्यक्ति की वर्तमान स्थिति को देखकर उसके भविष्य का मजाक नही उड़ाना चाहिए। क्योंकि कल में इतनी शक्ति होती है कि वह एक मामूली कोयले के टुकड़े को हीरे में तबदिल कर सकता है।

आज हम आपको एक ऐसे ही इंसान के बारे में बताएंगे जिन्होंने अत्यंत गरीबी को झेला है। उनकी माँ शराब बेचकर उनका लालन-पालन की और आज वह इंसान कलेक्टर बन गए हैं। आइये जानते है उनके बारे में।

राजेंद्र भारुड़ का परिचय

राजेंद्र भारुड़ का जन्म 7 जनवरी 1988 को महाराष्ट्र के धुले जिले के समोडा में हुआ था। राजेंद्र का जन्म एक आदिवासी परिवार में हुआ था। उनसे बड़े उनके 1 भाई और 1 बहन थी। जब वो माँ की गर्भ में थे, तभी उनके पिता गुजर गए थे। उनका परिवार इतना गरीब था की उनके पिता की फ़ोटो भी उनके घर पर नही थी।राजेंद्र अपने पिता की कभी चेहर तक भी नहीं देख पाए थे।

गरीबी के कारण शराब बेचती थी माँ

राजेंद्र की माँ रोज खेतों में मजदूरी के लिए जाया करती थी। पर वहां काम करने के बाद भी इतने रूपए नहीं मिल पाते थे। जिस से घर खर्च निकाला जा सके। इसलिए उनकी माँ ने देशी शराब का बिजनेस शुरू कर दिया। आदिवासी क्षेत्रों में महुआ के बीज से बनाए शराब का चलन था। इसे वहां गैरकानूनी भी नहीं माना जाता है। जिसके वजह से ये आसानी से उन इलाकों में खरीदे और बेचे जाते थे।

माँ ने गरीबी में पाला

राजेंद्र जब मां के गर्भ में थे उसी समय इनके पिता की मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद इस परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। गन्ने की पत्तियों से बनी छोटी सी झोपड़ी में राजेंद्र का पूरा परिवार रहता था। दिन भर उनके घर में शराब खरीदने व पीने वालों का जमावड़ा लगा रहता था।शराब पीने आने वाले लोग उन्हें कोई न कोई काम बताते रहते थे। पीने वाले लोग स्नैक्स के बदले पैसे देते थे। उससे बचने वाले पैसे से राजेंद्र किताबें खरीदते थे।

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राजेन्द्र ने पढ़ाई जारी रखा

राजेंद्र ने इतनी बुरी परिस्थिति के बाद भी पढ़ाई जारी रखा। उन्होंने 10वीं में 95% अंकों के साथ तथा 12वीं 90% से पास किया। साल 2006 में उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी। ओपन मेरिट के तहत उन्होंने मुंबई के सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। साल 2011 में उन्होंने यूपीएससी का फॉर्म भरा और पहली बार में ही चयनित हो गए। वह IAS होने के बाद कलेक्टर बन गए। उनके कलेक्टर बनने के बाद उनकी माँ बहुत खुश हुई। आज आईएएस राजेन्द्र अपनी माँ को अपना सबकुछ मानते हैं। वो कहते हैं कि उनके सफलता के पीछे उनकी माँ का बहुत बड़ा योगदान है। अगर उनकी माँ नही होती तो आज वह इस मुकाम पर नही होते।

आज राजेंद्र भारुड़ से युवाओं को सीखने की आवश्यकता है। इतने बुरे परिस्थिति के बाद भी राजेन्द्र के हौसलें ने उन्हें सफलता की मंजिल तक पहुँचाया है।

Shubham Jha
Shubham Jha
शुभम झा (Shubham Jha)एक पत्रकार (Journalist) हैं। भारत में पत्रकारिता के क्षेत्र में बदलाव लाने की ख्वाहिश रखते हैं। वह चाहते हैं कि पत्रकारिता स्वच्छ और निष्पक्ष रूप से किया जाए। शुभम ने पटना विश्वविद्यालय (Patna University) से पढ़ाई की है। वह अपने लेखनी के माध्यम से भी लोगों को जागरूक करते हैं।

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