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Monday, January 30, 2023

‘लौंडा नाच’ से देश का मान बढाने वाले रामचंद्र मांझी को पद्मश्री, क्या आप जानते हैं इस लुप्त होती कला को?

एक कलाकार के लिए उसकी कला से बढ़कर और कुछ नहीं होता। उसकी उम्र भी उसकी कला को प्रदर्शित करने के मार्ग में बाधा नहीं बनती। इस बात को प्रमाणित करने वाले शख्स हैं, बिहार के रहने वाले रामंचद्र मांझी। रामचंद्र मांझी बिहार के एक नृत्य कलाकार हैं। उन्होंने मात्र 10 वर्ष की उम्र से ही अपनी कला के जरिए हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया था। आज बिहार में वह लोक नृत्य (लौंडा नाच)की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इस नृत्य में पुरूष महिलाओं के जैसे कपड़े पहनकर डांस करते हैं। 95 वर्ष की आयु में भी रामचंद्र पूरे जोश के साथ स्टेज पर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। और दर्शकों का दिल जीतते हैं। उनकी इस अद्भुत कला के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है। यही नहीं बिहार सरकार ने भी रामंचद्र मांझी को पटना में एक समारोह के दौरान लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया था। लेकिन रामंचद्र मांझी के लिए गांव-गांव अपनी कला का प्रदर्शन करने से लेकर पद्मश्री सम्मान पाने तक का सफर तय करना आसान नहीं था। आइए जानते हैं उनके संघर्ष और सफलता का प्रेरणादायी सफर।

10 साल की उम्र से ही गुरु भिखारी ठाकुर के साथ देने लगे थे स्टेज परफॉर्मेंस

बिहार के मशहूर लौंडा नाच के प्रसिद्ध कलाकार रामचंद्र मांझी सारण जिले के नगरा तुजारपुर के रहने वाले हैं। जब वह 10 साल के थे तभी गुरु भिखारी ठाकुर के साथ स्टेज पर अपनी कला का प्रदर्शन करने लगे थे। इसके बाद वह 1971 तक भिखारी ठाकुर की छाया तले ही कला का प्रदर्शन करते रहे। भोजपुरी के शेक्सपीयर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर के निधन के बाद रामचंद्र मांझी ने गौरीशंकर ठाकुर, शत्रुघ्न ठाकुर, दिनकर ठाकुर, रामदास राही और प्रभुनाथ ठाकुर के नेतृत्व में काम किया।

94 वर्ष की उम्र में भी मंच पर सभी को कर देते हैं मंत्रमुग्ध

रामचंद्र मांझी 94 वर्ष के होने के बाद भी आज मंच पर जमकर थिरकते और अभिनय करते हैं। रामचंद्र मांझी जिस कला के लिए जाने जाते हैं। एक वक्त बिहार में उसका डंका बजता था। बदलते वक्त के साथ डीजे और ऑर्केस्ट्रा ने भले ही अपनी अलग जगह बना ली हो, लेकिन आज भी इस कला के लाखों कद्रदान हैं। 94 साल की उम्र में भी रामचंद्र मांझी के पांव ऐसे थिरकते हैं, जैसे 10 साल की उम्र में थिरकते थे। रंगमंच पर नाट्यकला की इस कला के माहिर रामचंद्र आज कलाकारों के गुरु हैं। आज भी लोग दूर-दूर से उनकी नृत्य कला को देखने आते हैं।

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क्या है बिहार का मशहूर लोक नृत्य (लौंडा नृत्य)

लौंडा नाच बिहार की प्राचीन लोक नृत्यों में से एक है। इसमें लड़का, लड़की की तरह मेकअप करके एक महिला की वेशभूषा में नृत्य करता है। किसी भी शुभ मौके पर लोग अपने यहां ऐसे आयोजन कराते हैं। आज इसकी लोकप्रियता जरूर कम हो गयी है, लेकिन आज भी मांझी जैसे लोगों ने इस कला को जीवित रखा हुआ हैं।

पद्मश्री सहित कई सम्मान से हो चुके हैं सम्मानित

रामचंद्र मांझी अपनी कला के दम पर आज पूरे बिहार का नाम रौशन कर चुके हैं। उनकी कला के लिए उन्हें कई सम्मान से सम्मानित भी किया है। केंद्रीय संगीत नाटक एकेडमी की तरफ से रामचंद्र मांझी को लोक रंगमंच पुरस्कार के लिए भी चुना जा चुका है। यह एकेडमी पुरस्कार 1954 से हर साल रंगमंच, नृत्य, लोक संगीत, ट्राइबल म्यूजिक समेत कई अन्य क्षेत्रों और विधाओं के लिए दिया जाता है। इसके लिए हर साल देश भर से कलाकारों का चयन किया जाता है। यही नहीं बिहार सरकार ने उन्हें लाइफ़ टाईम अचीवमेंट अवार्ड से भी नवाज़ा है। उनकी बेहतरीन कला को देखते हुए रामचंद्र मांझी को भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से भी सम्मानित किया है।

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सपने में भी जो ना सोचा था वह हुआ सच: रामचंद्र मांझी

रामचन्द्र मांझी अपनी उपलब्धियों के बारे में बात करते हुए कहते हैं कि, उन्होंने कभी अपने सपने में भी नहीं सोचा था। कि उनकी कला के लिए उन्हें इतने बड़े सम्मान से नवाजा जाएगा। रामचन्द्र मांझी कहते हैं, कि उन्हें पुरस्कार मिलने से नए कलाकारों को प्रेरणा मिलेगी और लोक कला के क्षेत्र में लोगों की रुचि बढ़ेगी।

रामचन्द्र मांझी जैसे कलाकारों ने ही आज लोक संगीत और नृत्य को जीवित रखा हुआ है। रामचन्द्र मांझी ने अपनी मेहनत और कला के दम पर अपनी सफलता की कहानी लिखी हैं। उनकी यह कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत है।

Sunidhi Kashyap
Sunidhi Kashyap
सुनिधि वर्तमान में St Xavier's College से बीसीए कर रहीं हैं। पढ़ाई के साथ-साथ सुनिधि अपने खूबसूरत कलम से दुनिया में बदलाव लाने की हसरत भी रखती हैं।

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