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Monday, January 30, 2023

लोगों को राजमा-चावल खिला कर दिव्यांग पति और बच्चों का पेट पालती हैं, ‘राजमा चावल दीदी’ के नाम से हैं फेमस

दोस्तों, कहते हैं कि जब तक जीवन है तब तक परेशानी है। लेकिन बहुत सारी ऐसी परेशानियां हैं जो आपका हिम्मत तोड़ने के लिए काफी है। फिर भी इस दुनिया में बहुत ऐसे लोग हैं जो इस परेशानी का हिम्मत के साथ सामना तो करते ही हैं साथ ही दूसरों के लिए प्रेरणा का भी स्रोत बनते हैं। ऐसी ही एक कहानी दिल्ली के दिलेर 36 वर्षीय आशा गुप्ता की है जिन्होंने मुश्किलों का सामना करते हुए अपने परिवार का भरण पोषण तो किया ही साथ ही लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनीं।

परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाते जुटाते बन गई “मोपेड वाली राजमा चावल दीदी”

आशा दिल्ली के शास्त्री नगर में रोजाना मोपेड से जाकर राजमा चावल बेचती है। आशा के पति दिव्यांग तथा उनके दो बच्चे भी हैं। इन सब की जिम्मेदारी अकेले आशा के ऊपर ही है। अपनी हालात को देखते हुए आशा एक स्टॉल लगाकर राजमा चावल बेचती हैं जिससे उनके घर का खर्च चलता है। राजमा चावल बेचते बेचते हैं उनके घर की स्थिति तो संभला ही साथ ही वह बन गई ‘मोपेड वाली राजमा चावल दीदी’।

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Source- TheBetterIndia

लॉकडाउन के चलते हैं काम बंद हो गया था।

जैसा कि आप जानते हैं की आशा के पति जो दिव्यांग हैं उनकी तथा दो बच्चों की जिम्मेदारी आशा के ऊपर ही थी। आशा स्थानीय दुकानदार से अलग-अलग तरह के सामान खरीद कर साप्ताहिक बाजार में बेचती थी। जिससे जैसे तैसे आशा के घर का खर्च निकल पाता था। लेकिन करो’ना महामारी में हुए लॉकडाउन के कारण उनका यह कारोबार भी बंद हो गया।

Rajma Chawal Didi 1
Source- TheBetterIndia

पति के मोपेड से शुरू किया फूड बिजनेस।

क’रोना महामारी में हुए लॉकडाउन के कारण घर का खर्च चलाना कितना मुश्किल हो रहा था यह तो आप सभी जानते ही हैं। पहले से जो बिजनेस चल रहा था वह लॉकडाउन के कारण बंद हो गया तभी आशा ने अपने पति के मोपेड से घर के पास ही एक फूड स्टॉल लगाने का निर्णय लिया। आशा ने 2500 रुपये से अपना बिजनेस दिनांक 2 दिसंबर से शुरू किया। शुरुआत में वह राजमा- चावल, कढ़ी -पकोड़ा, मटर -पनीर, और चावल बेचती थी। पहले तो उनका स्टॉल भरत नगर में था, लेकिन ज्यादा नहीं चलने के कारण यह स्टॉल बाद में शास्त्री नगर में चला गया।

प्रसिद्ध Youtuber गोल्डी सिंह ने मदद की।

गोल्डी सिंह बताते हैं कि जब उन्होंने आशा को देखा तब उन्हें लगा कि वह इससे भी बेहतर काम कर सकती हैं। और गोल्डी सिंह ने 30000 रुपये लगाकर आशा के एक साधारण मोपेड को एक मिनी फूड स्टॉल में बदल दिया। इतना ही नहीं ‘मोपेड वाली राजमा चावल दीदी’ का नाम भी गोल्डी सिंह ने ही दिया।

Rajma Chawal Didi 2
Source- TheBetterIndia

ग्राहक बढ़े तो मेन्यू भी बदल गया।

शुरुआत में आशा के मेनू में रोटी को शामिल नहीं किया गया था लेकिन बाद में ग्राहक के मांग पर रोटी को भी शामिल किया गया। उनके मेनू में ₹20 में स्मॉल प्लेट ₹30 में मीडियम प्लेट तथा ₹50 में लार्ज प्लेट शामिल है। रायता का ₹10 अलग से चार्ज होता है। आशा रोजाना 11:00 से 4:00 अपने फूड स्टॉल पर काम करती है। आशा का कहना है कि हमने शुरुआत कर दी है आगे सफलता भगवान के हाथ में है।

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हम सलाम करते हैं आशा जी जैसी आत्मनिर्भर महिलाओं को जिन्होंने अपने मेहनत के दम पर नई ऊंचाइयों को हासिल किया है। इस प्रेरणादायक कहानी को अधिक से अधिक शेयर करें जिससे आशा जी की मदद हो पाए और अन्य महिलाएं भी इनसे प्रेरणा ले सकें।

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