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Monday, January 30, 2023

ये हैं 3 इडियट्स के असली ‘फुंगशुक वांगड़ू’, असल जिंदगी में हैं आमिर खान के किरदार से भी आगे

आप सभी ने फिल्म 3 इडियट्स तो जरूर देखी होगी। फिल्म में आमिर खान ने फुंगशुक वांगडू का किरदार निभाया था जिसे दर्शकों ने खूब पंसद किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं उनके द्वारा निभाया गया यह किरदार असल के फुंगशुक वांगडू से प्रेरित है।

फुंगशुक वांगडू के नाम से प्रसिद्ध इस इंजीनियर का असली नाम सोनम वांगचुक है। सोनम बर्फीले रेगिस्तान में बच्चों के लिए शिक्षा में सुधार का बीड़ा उठाए हुए हैं। इस दुर्गम इलाके में सोनम और उनके साथियों ने 1988 में एक अभियान खड़ा किया था। जिसे स्टूडेंट एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख यानी सेकमॉल कहा जाता है। आज कई फेल छात्र भी इनसे शिक्षा प्राप्त कर बड़े वैज्ञानिक बन चुके हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में।

सोनम पेशे से इंजीनियर

सोनम खुद पेशे से एक इंजीनियर हैं और लद्दाख के इलाकों में पिछले 20 वर्षों से कार्यरत हैं। वह स्टूडेंट एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख के नाम से मूवमेंट चला रहे हैं। सोनम वांगचुक का जन्म 1 सिंतबर 1966 को लद्दाख के Uley-Tokpo गांव में हुआ था। उनके परिवार में सिर्फ 3 लोग ही रहते थे। उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती 8 वर्ष अपनी मां के साथ बिताए। उनकी प्रारंभिक सिक्षा खेल-खेल में ही हुई। जिसके बाद कक्षा 1 से 3 तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वो सामान्य रुप से स्कूल गए।

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पिता थे राजनीति में

सोनम के पिता नेता थे। सोनम चाहते तो वह भी राजनीति में जा सकते थे। लेकिन उन्होंने इंजीनियरिंग को चुना। वह मैकेनिकल इंजीनियर बनना चाहते थे, जिसे पूरा करने के लिए उनका अपने पिता के साथ काफी विवाद भी हुआ। उनके पिता चाहते थे सिविल इंजीनियरिंग करें। इस कारण उन्हें घर से निकलना पड़ा। आखिर कार उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। सोनम चाहते तो इंजीनियर बनकर अच्छी जगह नौकरी कर सकते थे। लेकिन उन्होंने स्कूल में पढ़ाना उचित समझा।

शिक्षा के सुधार के लिए काम किया

सोनम साइंस और मैथ्स जानते थे, तो उन्होंने लेह में पहला कोचिंग सेंटर खोला। दो महीने में ही चार साल का पढ़ाई का खर्च निकल गया लेकिन उससे बड़ा परिवर्तन आया। सोनम ने देखा कि कैसे शिक्षा के अभाव में अच्छे बच्चों को भी फेल कर दिया जाता था। इसलिए वह शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने के लिए जुट गए। साल 1988 में सोनम और उनके साथियों ने एक अभियान के रुप में स्टूडेंट एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख यानी सेकमॉल की शुरूआत की थी।

बच्चों को कर रहे है तैयार

सोनम यहां ऐसे बच्चों को जगह देते हैं जो सिस्टम से नकार दिए गए होते हैं। वह उन्हें वॉलंटियर बनाकर स्वयं काम करने के लिए प्रेरित करते हैं। अब तक वो 1000 से भी ज्यादा बच्चों को प्रेरित कर चुकें हैं। उन्होंने इस मकाम को बड़ी मुश्किलों के साथ पाया है। सोनम वांगचुक का कहना है कि इंजीनियरिंग मेरा शौक है और अब हम वैकल्पिक विश्वविद्यालय पर काम कर रहे हैं। इसमें बच्चे हाथ से काम करके सीख रहे हैं। इसके प्लानिंग वर्कशॉप काम कर रहे हैं। यहां कोई फीस नहीं होगी, शिक्षा मुफ्त होगी।

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बच्चों के साथ मिलकर नई तकनीक विकशित की

सोनम ने बर्फ पिघलाकर पानी बनाने की नई तकनीक भी विकसित की है। सोनम पीने के पानी और खेती के लिए भी अपने स्टूडेंट्स के साथ अभियान चलाए हुए हैं। लद्दाख में खेती और वृक्षारोपण के लिए वांगचुक ने एक नया तरीका विकसित किया है। इसमें स्थानीय लोगों से कहा गया कि वे बर्फ के स्तूप बनाएं, जो 40 मीटर तक ऊंचा रहें। 10 हैक्टेयर जमीन को इस तरह के एक स्तूप से सिंचित किया जाता है। करीब 1 करोड़ 60 लाख लीटर पानी की व्यवस्था एक स्तूप से होती है।

सोनम वांगचुक का जीवन आज सभी के लिए एक प्रेरणा है।

Sunidhi Kashyap
Sunidhi Kashyap
सुनिधि वर्तमान में St Xavier's College से बीसीए कर रहीं हैं। पढ़ाई के साथ-साथ सुनिधि अपने खूबसूरत कलम से दुनिया में बदलाव लाने की हसरत भी रखती हैं।

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