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Tuesday, November 30, 2021

प्लास्टिक के कचरों से बनाती है सजावट का सामान, 2000 से अधिक महिलाओं को दे रहीं है प्रशिक्षण

अक्सर लोग प्लास्टिक के डब्बों को इस्तेमाल करने के बाद उसको इधर-उधर फेंक देते हैं, जिससे ढेरों कचरे जमा हो जाते हैं। प्लास्टिक के कचरे वातावरण पर दुष्प्रभाव डालते हैं लेकिन इन प्लास्टिक के डिब्बों से कई प्रकार की सजावटी सामान बनाये जा सकते है जो आपके घरों में चार चांद लगाते हैं। इसी विषय में आज हम आपको रूपज्योति सैकिया गोगोई ( Rupjyoti Saikia Gogoi)के बारे में बताएंगे, जो प्लास्टिक के डिब्बों से घर में सजावट की सामान बना रही है, जो आपको घरों की रौनक बढ़ाएगी।

महिला का परिचय

रूपज्योति सैकिया काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास की रहने वाली है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एक विश्व धरोहर के नाम से जानी जाती है लेकिन वहां की अधिक आबादी के कारण वहां कचरों के ढ़ेर लगे रहते है, इसी कारण से वहां प्रदूषण का असर भी ज्यादा होता जा रहा है। वहां के ऐसे दृश्य को देखकर रूपज्योति पर्यावरण प्रदूषण के निवारण में अपना योगदान देने की कोशिश में है।

रोजगार के लिए मिला आईडिया

पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए रूप ज्योति ने 2004 में अपना “विलेज वेव्स” की शुरू किया। रूपज्योति इस प्रकार की उत्कृष्ट काम के लिए 35 से अधिक ग्रामीण लोगों को रोजगार दिया है। अलग-अलग क्षेत्रों से प्लास्टिक के कचरे को जमा करने का काम शुरू किया फिर उसी कचरे से टेबल मेट, डोरमेट, हैंड बैग और भी कई प्रकार के सजावटी सामानों का निर्माण करने लगी।

महिलाओं को प्रशिक्षण दिया

इस कार्य को करने के लिए उनको किसी भी प्रकार की कोई जानकारी नहीं थी लेकिन पर्यावरण के बचाव के लिए यह काम करना बेहद जरूरी था। इस काम को करने के लिए रूपज्योति ने देश भर के 2000 से भी अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया। 2004 में उन्होंने प्लास्टिक कचरे को बुनने की शुरुआत की थी। शुरू शुरू में इस प्रकार के काम को करना बेहद कठिन था लेकिन धीरे-धीरे इस काम में उन्हें सफलता मिलती गई। उनके इस बेहतरीन काम को देखने के बाद आस-पड़ोस की महिलाएं भी उनके साथ जुड़ने लगी।

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घर की सुंदरता बढ़ाने के लिए कचरो का प्रयोग किया जा सकता है

कचरे से घर सजावट करने के काम को रूपज्योति ने कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं लिया है। वह पर्यावरण की रक्षा करने के लिए इस काम में अपना कदम बढ़ाई थी। ताकि इन कचरों से पर्यावरण को बचाया जा सके। इन कचरों से हस्त निर्माण उत्पादों को रंग-बिरंगे बनाने के लिए सभी प्रकार के प्लास्टिक के कचरे का इस्तेमाल किया जाता हैं। उन्होंने अपने उत्पादों को बेचने का काम वर्ष 2012 में काजीरंगा हाट से शुरुआत की थी। रूपज्योति अपने खूबसूरत रंग-बिरंगे उत्पादों को देश-विदेश में बेचने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी उपयोग कर रही हैं। इस प्रकार के नेक काम से पर्यावरण को भी बचाया जा सकता है और घर की खूबसूरती भी बढ़ाई जा सकती है।

Shubham Jha
Shubham वर्तमान में पटना विश्वविद्यालय (Patna University) में स्नात्तकोत्तर के छात्र हैं। पढ़ाई के साथ-साथ शुभम अपनी लेखनी के माध्यम से दुनिया में बदलाव लाने की ख्वाहिश रखते हैं। इसके अलावे शुभम कॉलेज के गैर-शैक्षणिक क्रियाकलापों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

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