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Tuesday, November 30, 2021

कभी खाने को नहीं थे पैसे, कड़ी मेहनत के दम पर आज वायुसेना में फाइटर जेट पायलट हैं: एस्टन वून

हमारे देश की सेनाएं देश की रक्षा के लिए हमेशा समर्पित रहती है। आज हम आपको एयरफोर्स फाईटर पायलट एस्टन वून (Air force fighter pilot Aston Voon) के बारे में बताएंगे। एस्टन अपने जीवन में आने वाली सभी कठिनाइयों का सामना कर अपने सपने को पाने में कामयाब रहें। Success story of Aston Voon working as airforce fighter pilot in Indian Airforce.

कई बार भूखे पेट भी सोना पड़ता था

एस्टन वून (Aston voon) आज भारतीय वायु सेना में फाईटर पायलट के रूप में कार्यरत है। उनका बचपन बहुत ही गरीबी में बीता है। उनके परिवार में पैसे की इतनी कमी थी कि उन्हें कई बार खाना भी बड़ी मुश्किल से मिलता था लेकिन भूखे पेट रहते हुए भी उनका सपना सैनिक बनकर देश की रक्षा करने का था। विपरीत परिस्थितियों का सामना कर एस्टन वून ने अपने कठिन प्रयासों से कामयाबी हासिल किया।

चचेरे भाई से मिली प्रेरणा

एस्टन वून ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि जब वह 12वीं कक्षा में थे तब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब था तभी उन्होंने एनडीए (NDA) के लिए आवेदन सबमिट किया। इसी बीच उनके पिता को हर्टअटैक का दौरा पड़ा जिस कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। पिता की बीमारी की वजह से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, तब एस्टन वून अपनी पढ़ाई छोड़ कर काम करने लगे। धीरे-धीरे उनके पिता की तबीयत में सुधार आने लगा, तब उन्होंने अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाने का विचार किया। तब उनके चचेरे भाई ने एनडीए के थ्रू उन्हें सेना में भर्ती होने की सलाह दी। उन्हें अपने भाई का सलाह पसंद आई। अपने चचेरे भाई की सलाह पर चलते हुए कठिन परिश्रम के दम पर अपने लक्ष्य को पूरा किया।

बहन के शादी में बेचनी पड़ी खेत

एस्टन वून को एनडीए की परीक्षा पास करने से पहले बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पैसे की कमी थी लेकिन उनके पिता ने अपने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए जी जान से खेती में जुट गए। खेती से मिले पैसे से अपने बेटे की मदद करने लगे लेकिन उनकी बहन की शादी करने के लिए उनके पिता को खेत बेचना पड़ा।

अंग्रेजी (English) भाषा में थे कमज़ोर

किसी तरह उनका चयन एनडीए में हो गया और वह कामयाबी की सीढ़ी चढ़ने लगे लेकिन ट्रेनिंग के दौरान फिर एक समस्या सामने आकर खड़ी हो गई, वह समस्या थी अंग्रेजी भाषा की जानकारी न होना लेकिन उन्होंने हार नहीं माना। उन्होंने अंग्रेजी के तरफ अपना पूरा ध्यान देना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे अंग्रेजी में अपनी अच्छी पकड़ बना लिया। राहों में आने वाले बाधाओं को पार करते हुए अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते चले गए।

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पिता का हुआ देहांत

जब एस्टन वून छुट्टी में अपने घर आए थे तब उसी दौरान उनके पिता की तबीयत काफी बिगड़ गई। पिता को अस्पताल ले के जाने तक उनके पिताजी की मृत्यु हो गई। अपने पिता को खोने के बाद वह बुरी तरह अंदर से टूट गए लेकिन उन्होंने अपने आप को मजबूत किया और अपनी ड्यूटी पर वापस लौटे।

आज हम सबको उनपर गर्व है। हमारे युवावों को भी उनसे प्रेरणा लेने की ज़रूरत है।

Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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