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Wednesday, February 8, 2023

दिव्यांग उन्मुल खेर के IAS बनने की कहानी पढ़कर आंखों में आ जाएंगे आँसू

“लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” इन पंक्तियों को तो आपने कितने बार सुना होगा। मगर कुछ लोग ही ऐसे होते हैं, जो इन पंक्तियों को सच साबित करते हैं। जो लोग कामयाब ना होने की वजह अपनी आर्थिक स्थिति, अपनी शारीरिक स्थिति को बताते हैं उन लोगों के लिए उम्मुल खेर एक मिसाल है।

आईये जानते है उम्मुल खेर के बारें में

दिल्ली के स्लम एरिया की झुग्गी झोपड़ियों से निकली आईएएस अफसर बनने वाली उम्मुल खेर शारिरिक रूप से अन्य लोगों की तरह सक्षम नहीं है। उनके पैरो में 16 बार फ्रै’क्चर हुआ है, 8 बार उनका ऑ’परेशन हुआ है। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, सर पर ना छत थी, ना मां का साया। फिर भी पहले ही प्रयास में IAS बनकर उम्मुल खेर ने इतिहास रच दिया है। लेकिन एक स्लम एरिया से निकलकर इतिहास रच देने का सफर उम्मुल के लिए इतना आसान नहीं था। इसके पीछे उनका कड़ा संघर्ष छिपा है। आइए जानते हैं उनके जीवन का संघर्ष से सफलता तक का प्रेरणादायी सफर।

पिता लगाते हैं ठेला, बेटी बनी IAS ऑफिसर

उम्मुल खेर मूलरूप से राजस्थान के पाली मारवाड़ की रहने वाली हैं। कई दशक पहले इनका परिवार दिल्ली आ गया था। दिल्ली के निजामुद्दीन के स्लम एरिया की एक झुग्गी झोपड़ी में इनका परिवार रहने लगा। नौकरी नहीं होने की वजह से उम्मुल के पिता गुजर-बसर करने के लिए सड़क किनारे ठेला लगाकर सामान बेचा करते थे। उससे जो पैसा मिलता था उसी से परिवार का घर खर्च चलता था। कमाई ज्यादा नहीं होने की वजह से उनका परिवार दिल्ली निजामुद्दीन इलाके में एक झुग्गी-झोपड़ी में रहता था। लेकिन 2001 में यहां की झुग्गीयां उजाड़ दी गईं, जिसकी वजह से उनका परिवार बेघर हो गया। जिसके बाद मजबूरी में उन्हें त्रिलोकपुरी में किराए का कमरा लेना पड़ा। पिताजी का काम निजामुद्दीन में था, जो यहां आने से चला गया। उस समय उम्मुल सातवीं कक्षा में पढ़ती थीं।

मां के दे’हांत के बाद खुद पढ़ाने लगीं ट्यूशन

उम्मुल जब स्कूल में थी तब उनकी मां का दे’हांत हो गया। उम्मुल की सौतेली मां के साथ उम्मुल का रिश्ता अच्छा नहीं था। घर में और भी कई समस्याएं थीं। उम्मुल के पापा के पास कोई नौकरी न होने की वजह से घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उम्मुल की पढ़ाई को लेकर घर में रोज़ झगड़ा हुआ करता था। अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए उम्मुल अपने घर से अलग हो गई तब वह नवीं क्लास में थी। त्रिलोकपुरी में एक छोटा सा कमरा किराया पर लिया। एक 9वीं क्लास की लड़की को त्रिलोकपुरी इलाके में अकेले किराए पर रहना आसान नहीं था, डर का माहौल था। उम्मुल को बहुत समस्या का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगीं। उम्मुल रोज आठ-आठ घंटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी। ट्यूशन पढ़ाने का नतीजा यह हुआ कि उनके परिवार और पढ़ाई का खर्च निकलने लगा।

दि’व्यांग होने के बाद भी नहीं खोया हौसला

उम्मुल खेर वि’कलांग पैदा हुईं थीं, लेकिन उन्होंने वि’कलांगता को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उम्मुल खेर बो’न फ्रे’जाइल डि’सऑर्डर से पी’ड़ित हैं। इस बीमारी से हड्डियां नाजुक हो जाती हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति ज्यादा प्रेशर नहीं झेल पाते हैं। और थोड़ी छोट से हड्डियां टूट जाती हैं। यही वजह है कि उम्मुल अब तक 15 फ्रैक्चर और 8 सर्जरी करवा चुकी हैं। उन्होंने मन लगाकर पढ़ाई की। वह ट्यूशन पढ़ाती रहीं और इसी दौरान उनका एडमिशन दिल्ली यूनिवर्सिटी में हो गया। इसके यहां से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने जेएनयू से मास्टर की डिग्री प्राप्त की।

पहले ही प्रयास में पास की IAS की परीक्षा

अपनी मास्टर की पढ़ाई पूरी करने के बाद उम्मुल ने जेएनयू में ही एमफिल में दाख़िला ले लिया। 2014 में उम्मुल का जापान के इंटरनेशनल लीडरशिप ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए चयन हुआ। 18 साल के इतिहास में सिर्फ तीन भारतीय इस प्रोग्राम के लिए सेलेक्ट हो पाए थे। और उम्मुल ऐसी चौथी भारतीय थीं जो इस प्रोग्राम के लिए सेलेक्ट हुई थीं। फिर उम्मुल एक साल छुट्टी लेकर इस प्रोग्राम के लिए जापान चली गई। इस प्रोग्राम के जरिये उम्मुल दिव्यांग लोगों को यह सिखाती थी कि कैसे एक इज्जत की ज़िंदगी जी जाए। उम्मुल खेर अपनी शोध की पढ़ाई के साथ-साथ आईएएस की तैयारी में जुट गईं।

कड़ी मेहनत कर किया अपने सपने को पूरा

जनवरी 2016 में उम्मुल ने आईएएस के लिए तैयारी शुरू की और अपने पहले प्रयास में सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर ली। उम्मुल खेर ने 420वीं रैंक हासिल की है। पहले ही प्रयास में उन्होंने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को पास कर दुनिया को दिखा दिया कि नामुमकिन कुछ भी नहीं है।

उम्मुल खेर फिलहाल असिस्टेंट कमिश्नर के रूप में कार्यरत है। उम्मुल खेर ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर अपनी सफलता की कहानी लिखी है। लाख परेशानियों का सामना करने के बाद भी उम्मुल ने कभी हार नहीं मानी, उन्होंने स्थिति को दोष देने के बजाय कुछ कर दिखाने की ठानी। जिसका नतीजा है कि आज उम्मुल खेर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गईं है।

Sunidhi Kashyap
Sunidhi Kashyap
सुनिधि वर्तमान में St Xavier's College से बीसीए कर रहीं हैं। पढ़ाई के साथ-साथ सुनिधि अपने खूबसूरत कलम से दुनिया में बदलाव लाने की हसरत भी रखती हैं।

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