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Monday, January 30, 2023

इस भिखारी के सामने नहीं चलेगा अब ‘छुट्टे नहीं हैं’ का बहाना, ऑनलाइन भीख लेता है ये बिहार का डिजिटल राजू

आप सबने कभी न कभी भिखारी को पैसे ज़रूर दिए होंगे। लेकिन क्या आपने किसी भिखारी को डिजिटल पेमेंट लेते हुए देखा या सुना है? आपको जानकर बहुत हैरानी होगी कि बिहार (Bihar) के बेतिया रेलवे स्टेशन (bettiah railway station) पर राजू प्रसाद (Raju Prasad) नामक एक भिखारी गले में ई-वॉलेट (e-wallet) का क्यूआर कोड (QR code) टांग रखा है और वह बचपन से स्टेशन पर भीख मांग कर अपना गुजारा करता है।

40 वर्षों से कर रहा है भीख मांगने का काम

अक्सर लोग भिखारियों से बचने के लिए छुट्टा नहीं होने का बहाना करते हैं इसलिए राजू ने अपना खाता बैंक (Bank) में खुलवा लिया है और लोगों से भीख के पैसे को फोन पर क्यूआर कोड स्कैन (scan) कर भेजने को कहा है। इसीलिए उनकी पहचान डिजिटल भिखारी (digital beggar) के रूप में होती है। राजू तकरीबन 40 वर्षों से भीख मांग कर अपना जीवन यापन कर रहे है।

भीख मांगना है कमाई का जरिया

हालांकि राजू की बुद्धि कम होने के कारण उसे कोई नौकरी नहीं मिल पाई। ऐसे में उसने भीख मांगना अपना पेशा बना लिया। राजू डिजिटल (digital) तरीके में भीख मांगने के अंदाज को लेकर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। वह बस (bus) और ट्रेन (train) के यात्रियों से मदद करने की गुहार करता लेकिन जब से राजू डिजिटल भिखारी बना हुआ है उसकी कमाई में काफी बढ़ोतरी हुई है। राजू अपने आप को मोदी (Modi) और लालू (Lalu) का फैन बताता है।

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छुट्टा नहीं होने का बहाना बनाते थे लोग

राजू का कहना है कि भीख मांगने पर अक्सर लोग छुट्टा नहीं होने का बहाना कर देते हैं और कुछ लोगों का तो कहना होता है कि नगद लेकर कौन चलता है इसीलिए मैंने क्यूआर कोड को भीख मांगने का जरिया बनाया। मैं ने ई-वॉलेट भी बना लिया है ताकि लोग भीख की रकम को आसानी से पे सके।

Shubham Jha
Shubham Jha
शुभम झा (Shubham Jha)एक पत्रकार (Journalist) हैं। भारत में पत्रकारिता के क्षेत्र में बदलाव लाने की ख्वाहिश रखते हैं। वह चाहते हैं कि पत्रकारिता स्वच्छ और निष्पक्ष रूप से किया जाए। शुभम ने पटना विश्वविद्यालय (Patna University) से पढ़ाई की है। वह अपने लेखनी के माध्यम से भी लोगों को जागरूक करते हैं।

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