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Wednesday, February 8, 2023

पिता के मौत के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत, पढ़िए कश्मीर की बेटी की ये प्रेरणादायक कहानी

हमारे देश में बहुत लोग ऐसे है जो UPSC पास करके अफसर बनना चाहते हैं। जो परीक्षार्थी आर्थिक रूप से सम्पन्न होते है उन्हें अपेक्षाकृत ज्यादा मुश्किलो का सामना नहीं पड़ता। लेकिन जो परीक्षार्थी आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं उनको इतनी सुख सुविधाएं नहीं मिल पाती और उन्हें बहुत ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। आज हम जिन के बारे में जानेंगे उन्होंने अपने जीवन मे बहुत-सी समस्याओं का सामना कर अपना मुकाम हासिल किया है।

मिलिए IAS रेहाना बशीर से

IAS रेहाना बशीर जम्मू-कश्मीर के पूंछ जिले के सलवा गाँव की रहने वाली हैं। रेहाना और उनके भाई जब छोटे थे तभी उनके पिताजी गुजर गए। उनके पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनकी माँ पर ही आ गई थी। इस वजह से उन्हें बचपन में बहुत परेशानिया उठानी पड़ी थी। पिता के ना होने से उनकी जिंदगी बाकी बच्चों जैसी नहीं थी। अपने परिवार की स्थिति को देखते हुए वो काफी मन लगा कर पढ़ाई करती थीं। रेहाना ने शेर-ए-कश्मीर इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज से MBBS की पढ़ाई पूरी किया है। उन्होंने ग्रेजुएशन करने के बाद P.G करने के लिए NEET एग्जाम की प्रवेश परीक्षा दिया थी जिसमे उनका चयन भी हो गया लेकिन उनका मन बदल गया इसीलिए वो NEET काउंसलिंग के लिए भी नही गई।

UPSC का जुनून

NEET के बदले उन्होंने UPSC की परीक्षा देने का निश्चय कर लिया। ग्रेजुएशन करने के दौरान रेहाना की स्थिति ऐसी थी कि सुख-सुविधाए होना तो दूर की बात है उनके पास रोजमर्रा की जरूरतों के समान भी उपलब्ध नहीं थे। रेहाना निश्चय नहीं कर पा रही थी कि वे UPSC की तैयारी करें या NEET P.G की। NEET P.G का एंट्रेस एग्जाम देने के बाद रेहाना निश्चय कर ली कि वे UPSC की तैयारी करेगी और मेडिकल क्षेत्र को छोड़ कर सिविल सर्विसेज जॉइन करेगी। रेहाना के हर निर्णय में उनके परिवार वाले उनका साथ देते थे इसीलिए इस निर्णय में भी उनको परिवार का साथ मिला। रेहाना ही नहीं बल्कि बहुत ऐसे प्रतिभागी होते हैं जो जल्दी निश्चय नहीं कर पाते है कि उन्हें क्या करना है।

समाज सेवा का था जुनून

रेहाना ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि डॉक्टर बन कर सिर्फ मरीज का इलाज़ ही किया जा सकता है, उनकी परिस्थितियों को नहीं सुधारा जा सकता, उनके परेशानियों का हल नहीं नहीं निकाला जा सकता। लेकिन सिविल सेवा में जाने के बाद वो बहुत सारे लोगों की परिशनियों का हल कर सकती हैं।

शुरुआत में मिली असफलता

रेहाना पहली बार में UPSC क्लियर नहीं कर पाईं इसलिए वो थोड़ा तनाव में रहने लगीं लेकिन उनके परिवार ने उनका हमेशा साथ दिया और उनका हौसला बढ़ाया। फिर वो दूसरी बार UPSC की तैयारी में लग गईं। उन्हें इस बार भी तैयारी के समय बहुत सी परिशनियो का सामना करना पड़ा। जहां उनका घर था वहाँ इंटरनेट भी ठीक से नहीं चलता था। तैयारी के बीच ही उनकी माँ की सर्जरी भी थी। उनके भैया भी प्रशिक्षण के लिए गए थे इसीलिए रेहाना को उनकी माँ का देखभाल अकेले करना पड़ता था। फिर भी उन्होंने अपनी टूटने नहीं दी।

भाग्य का भी मिला साथ

रेहाना का भाग्य भी उनका साथ दे रहा था। भाग्यवश रेहाना इंटरव्यू के 1 दिन पहले ही दिल्ली चली गई। नही तो इंटरव्यू के दैरान ही सर्जिकल स्ट्राईक की वजह से सारे एयरबेस बंद कर दिए गये थे। अगर वह 1 दिन पहले दिल्ली नहीं जाती तो उनका इंटरव्यू छुट जाता। और उनको अगले साल का इंतज़ार करना पड़ता। रेहाना 2018 में UPSC की परीक्षा 187वीं रैंक से पास कर गई। रेहाना बशीर के अलावा जम्मू-कश्मीर से 6 प्रतिभागियों ने 2018 में upsc की परीक्षा पास किये थे। लेकिन पहली महिला IAS का खिताब रेहाना को प्राप्त हुआ। रेहाना का भाई भी UPSC पास करके IRS के पद पर कार्यरत हो गया। रेहाना का कहना है, की भले ही हमारे पास सुख सुविधाएं कम हो लेकिन हम अपनी दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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