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Monday, January 30, 2023

नौकरी छोड़ बिना जमीन के शुरू की खेती, आज कर रहें हैं लाखों की कमाई

किसी भी तरह की खेती करने के लिए जमीन का होना अत्यंत आवश्यक है। अगर आपके पास जमीन नही है तो आप खेती करने के बारे सोच भी नही सकते।

पर आज हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी बताएंगे जिन्होंने बिना जमीन के खेती की और उससे लाखों कमा रहे हैं। आइये जानते है उनके बारे में।

अनिल कर रहे हैं लाखों की कमाई

जयपुर राजस्थान के एक सामान्य परिवार में अनिल थडानी का जन्म हुआ था। उनके पिता एक गौशाला में काम करते थे। अनिल थडानी के पास खेती के लिए ना तो कोई ज़मीन थी ना ही उनका फैमिली बैकग्राउंड खेती से जुड़ा हुआ था। इसके बाद भी वह खेती कर लाखों की कमाई कर रहे हैं।

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अनिल बन गए किसान

अनिल की शुरुआती पढ़ाई जयपुर में हुई। साल 2018 में नौकरी के साथ-साथ अनिल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर काम करते थे। वह उन किसानों के लिए फार्मिंग करने लगे जिनके पास अपनी जमीन थी। इसी बीच उन्हें सॉइल लेस (बिना जमीन के) फार्मिंग के बारे में पता चला और उन्होंने उस पर काम करना शुरू कर दिया।

खेती के लिए छोड़ दी अपनी नौकरी

खेती की तरफ रूझान बढ़ता देख अनिल ने साल 2020 में अपनी नौकरी छोड़ दी और नर्सरी का काम शुरू किया। उन्होंने कुछ गमले खरीदे और अपनी छत और घर की दीवारों को फूलों की नर्सरी में तब्दील कर दिया। उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा वैराइटी के फूल और सब्जियां लगाईं।

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क’रोना में भी नहीं खोया हौसला

साल 2020 में जब पूरी दुनिया क’रोना म’हामारी के चलते अस्त-व्यस्त हो गई थी। ऐसे में अनिल ने धैर्य नहीं खोया। इस समय का सही उपयोग अनिल ने नई जानकारी एकत्र कर किया। जब लॉ’कडाउन खत्म हुआ तो उन्होंने अपनी नर्सरी में तैयार फूलों और सब्जियों के बीजों की मार्केटिंग शुरू की। अनिल की खासियत है कि वह उन जगहों पर भी फार्मिंग कर रहे हैं जहां जमीन नहीं है। यानी छत और घर की दीवारों पर। अभी वो तीन तरह की फार्मिंग कर रहे हैं।

कुछ इस तरह पाई सफलता

अनिल ने खेती करने के लिए अपनी नर्सरी बनाई है। जहां 5 हजार से ज्यादा पौधे हैं। वे किसानों के लिए फल, फूल और सब्जियों के बीज उपलब्ध कराते हैं। जयपुर, पटना सहित देश के कई बड़े शहरों में वो बीज भेजते हैं।

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इस तरह बढ़ती गई उनकी खेती के तरफ लगाव

इसके साथ ही वह फार्मिंग कंसल्टेंसी का भी काम करते हैं। वे दूसरे के घरों में नर्सरी लगाते वो उन लोगों को सर्विस मुहैया कराते हैं जो वर्टीकल, टेरेस या हाइड्रोपोनिक फार्मिंग का सेटअप लगवाना चाहते हैं। वो उन्हें बीज से लेकर मेंटेनेंस तक की सर्विसेज प्रोवाइड कराते हैं।
उन्हें प्रोजेक्ट वर्क के लिए गांव-गांव जाना पड़ता था। जिनमें अक्सर उनसे खेती को लेकर चर्चा होती रहती थी। इसलिए फार्मिंग के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया।

कई लोगों को कर रहें है प्रेरित

अनिल के पास आज पास पांच हजार से ज्यादा फूलों और सब्जियों के प्लांट्स हैं। दो हजार से ज्यादा किसानों को ट्रेनिंग दे चुके हैं। 50 से ज्यादा घरों को वह फूलों और सब्जियों के गार्डन के रूप में बदल चुके हैं। इसके साथ ही 100 से ज्यादा उनके रेगुलर कस्टमर्स हैं जिन्हें वह फूलों और सब्जियों के बीज सप्लाई करते हैं। अनिल ने 6 महीने से भी कम वक्त में लाखों की कमाई की है।

अनिल से हमें यह सिख मिलती है कि विपरीत परिस्थिति में भी हमें अपना धैर्य नही खोना चाहिए।

Medha Pragati
Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।

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